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रिटेल में बड़ों की पैरवी

Last Updated- December 07, 2022 | 2:00 AM IST

संगठित खुदरा कारोबार के फैलते जाल का विरोध करने वाले इसके खिलाफ चाहे जितनी दलीलें दें लेकिन सरकारी अध्ययन के मुताबिक यह आपके पड़ोस के किराने वाले के लिए उतना बड़ा विलेन भी नहीं है।


जितना कि बड़ा बनाकर इसे पेश किया जा रहा है। इंडियन काउंसिल फॉर रिसर्च ऑन इंटरनेशनल इकॉनॉमिक रिलेशन्स (इक्रियर) की रिपोर्ट तो कम से कम यही कहती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि संगठित रिटेल से थोड़े समय के लिए बिक्री और मुनाफा कम हो जाता है लेकिन यह प्रभाव समय बीतने पर धीरे-धीरे कम हो जाता है।

वाणिज्य मंत्रालय के अधीन औद्योगिक नीति और संवर्धन विभाग (डीआईपीपी) के लिए किए गए इस अध्ययन में इकरा ने कहा है कि संगठित खुदरा क्षेत्र उपभोक्ताओं और किसानों दोनों के लिए फायदे का सौदा है। रिपोर्ट के अनुसार कम आय वर्ग वाले लोगों के लिए बड़े स्टोर ज्यादा बचत का कारण बनते हैं जबकि किसानों के लिए यह इसलिए बेहतर हैं क्योंकि इनके जरिए वह सीधे रिटेलर को अपनी उपज बेच सकते हैं। 

इक्रियर ने अपनी रिपोर्ट में कैश एंड कैरी आउटलेट्स की सुविधाएं देने की वकालत की है जिससे यह असंगठित स्टोरों को बिक्री के लिए माल उपलब्ध करा सके और किसानों से उपज हासिल कर सके। इसके लिए देश भर में समान लाइसेंसिंग नीति की सिफारिश भी की गई है।  अध्ययन में किसानों के कोऑपरेटिव्स के गठन का सुझाव दिया गया है जिससे वे बड़े सुपर मार्केट को सीधे अपना उत्पाद बेच सकें।

First Published - May 27, 2008 | 12:51 AM IST

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