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महंगा पड़ रहा है अमेरिका, यूरोप में माल पहुंचाना

Last Updated- December 07, 2022 | 2:03 AM IST

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग से भारत से अमेरिका और यूरोप के लिए माल भाड़े में क्रमश: 60 और 35 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।


प्रमुख शिपिंग लाइंस चलाने वाली कंपनियों का कहना है कि पिछले पांच महीनों में अमेरिका और यूरोप के लिए समुद्र के रास्ते जाने वाले माल भाड़े में क्रमश: 1,900 अमेरिकी डॉलर और 1,650 अमेरिकी डॉलर की बढ़ोतरी हुई है। यह दर प्रति 20 फुट समतुल्य इकाई (टीईयू) के हिसाब से है।

अमेरिका की एक शिपिंग लाइंस कंपनी के एक वरिष्ठ कार्यकारी के अनुसार भाड़े में इस बढ़ोतरी की वजह कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतें हैं। इस वर्ष जनवरी में कच्चे तेल की कीमतें प्रति बैरल 99.62 डॉलर के आस पास थीं, जो बढ़कर 132 डॉलर पर पहुंच गई हैं।

फुटवियर निर्यातक फरीदा समूह के एम रफीक अहमद का कहना है कि अमेरिकी उपभोक्ता कीमतों में बढ़ोतरी की भरपाई के लिए तैयार नहीं हैं। वजह यह है कि एक साल पहले ही उपभोक्ताओं से लागत, बीमा भाड़े (सीआईएफ) के आधार पर माल ढुलाई के लिए करार कर लिया गया है। ऐसे में सारा नुकसान शिपिंग कंपनियों को ही उठाना पड़ रहा है।

ऑटोमोटिव कॉम्पोनेंट मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन के कार्यकारी निदेशक विष्णु माथुर का कहना है कि कुछ सदस्यों ने फ्रेट ऑन बोर्ड (एफओबी) के तहत निर्यात करार किया है। उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ेगा।

First Published - May 28, 2008 | 11:00 PM IST

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