विशुद्ध धार्मिक और ठेठ महाराष्ट्रीयन अंदाज में मनाये जाने वाले गणेशोत्सव का रूप अब बदलता नजर आ रहा है।
इस बार के गणेशोत्सव में श्रद्धा और भक्ति के साथ-साथ बाजारवाद का नया अंदाज, बीमा कंपनियों की चांदी, सुरक्षा के भारी तामझाम के साथ ऐतिहासिक और सांस्कृतिक झलक भी गणेश पंडालों में देखने को मिल रही है।
सभी को मिला काम
गणपति बप्पा मोरया के जयकारों के साथ लंबे समय से मंदी की मार झेल रहे व्यापरियों के चेहरे भी खिल उठे हैं। मुंबई के लगभग सभी मॉल और दुकानों में खरीदारों की भीड उमड पड़ी है। गणेश मूर्तियां, सजावटी सामान, मिठाई, कपड़े, फूल बाजार के साथ मोटरसाइकिल और कार बाजार में भी रौनक बढ़ गई है। पंडित, पुजारी, बैड बाजा, लाइटिंग और सजावट करने वालों के पास भी काम ही काम है।
मूर्तिकार जतिन भाई के अनुसार, मुंबई में लगभग 1200 गणेश मंडल हैं और लगभग 10 लाख लोगों ने अपने घरों में गणपति बप्पा की मूर्तियां स्थापित की हैं। गणेशोत्सव के साथ ही महाराष्ट्र में त्योहारों का मौसम शुरू हो जाता है, जिससे आने वाले तीन-चार महीनों तक बाजार में रौनक बनी रहने की उम्मीद जताई जा रही है।
भगवान का भी बीमा
लालबाग के राजा के नाम से प्रसिद्ध परेल इलाके में स्थित गणेश प्रतिमा और उसके पंडाल का 2.65 करोड़ रुपये का बीमा कराया गया है। मंडल के अध्यक्ष सुनील जोशी कहते हैं कि आयोजन के 75 साल के इतिहास में यह पहला अवसर है, जब प्रतिमा का बीमा कराया गया है।
10 दिनों तक चलने वाले उत्सव में आने वाले भक्तों का भी एक करोड़ रुपये का बीमा कराया गया है। यहां कोई हादसा होने पर प्रत्येक भक्त को 50 हजार का मुआवजा दिया जाएगा। किंग सर्किल के गणेश मंडल ने मूर्ति का 5 करोड़ रुपये का बीमा कराया है। मंडल के अध्यक्ष भुजंग पई के अनुसार गणेश मूर्ति में 44 किलो सोना और 140 किलो चांदी के आभूषण लगे हैं। अनुमान के मुताबिक, इस बार गणेशोत्सव के दौरान 50 करोड़ रुपये का बीमा कराया गया है।
अनोखे पंडाल
इस बार गणेश मंडलों में महाराष्ट्र की संस्कृति और ऐतिहासिक धरोहर को भी महसूस किया जा रहा है। अपनी भव्यता के लिए जाना जाने वाला लालबाग के राजा के मुख्य द्वार की सजावट सोलहवीं सदी में शिवाजी महाराज के किलों की तरह की गई है। इसकी सजावट प्रसिद्ध सेट डिजाइनर नितिन देसाई ने की है।
देसाई का मानना है कि गणेशोत्सव अब सिर्फ मुंबई या महाराष्ट्र तक ही सीमित नहीं है, यहां दर्शन करने देश के हर कोने से लोग आते हैं। मंडल ने सोने की लंका के रूप में पंडाल को बनाया है। सांताक्रुज में अभिमन्यु गणेश मंडल ने अपने पंडाल को अष्टविनायक के आठवें गणपति मंदिर का स्वरूप दिया है। लोअर परेल के माधव भुवन गणेश मंडल ने शीश महल तैयार किया है।
अखिल महाकाली सार्वजनिक गणेश मंडल, अंधेरी ने पंडाल को संसद का रूप दिया है। महालक्ष्मी गणेश मंडल ने मुंबई की पहचान डब्बावालों के डब्बे को अपने पंडाल को आधार बनाया है। तिलक नगर में बच्चों को अपने प्रिय डिज्नी लैड का रुप देखने को मिल रहा है, तो तुलसीवाडी में टॉफी और चॉकलेट से गणेश मूर्ति सजाई गई है।