डीजल के दामों में बढ़ोतरी से छोटी और मझोली कंपनियों के राजस्व पर भार बढ़ना तय है।
ऐसा इसलिए कहा जा रहा है, क्योंकि इन कंपनियों में बिजली की जरूरत के लिए ज्यादातर डीजल से चलने वाले जेनरेटरों का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में दाम बढ़ने से उनके ईंधन बिल में तकरीबन 10 फीसदी का इजाफा हो सकता है।
गुड़गांव स्थित द माल्ट कंपनी (इंडिया) लिमिटेड के निदेशक मोहित जैन का कहना है कि तेल की कीमतें बढ़ने से कंपनियों पर भार बढ़ेगा, जिसे वहन करने में वे सक्षम नहीं होंगी और उसका भार अंतत: उपभोक्ताओं को ही वहन करना पड़ेगा। दरअसल, बिजली के लिए राज्य के ज्यादातर उद्योग डीजल जेनसेट के सहारे ही हैं।
पिछले छह माह में डीजल की मांग में 16-17 फीसदी का उछज्ञल आया है, जबकि इससे पहले 7-9 फीसदी का ही उछाल दर्ज किया गया था। तेल कंपनी के एक अधिकारी ने बताया कि ईंधन के तौर पर लोग डीजल के इस्तेमाल को बढ़ावा दे रहे हैं, क्योंकि यह उन्हें सस्ता पड़ रहा है।
पुणे में कंपनियां 80 से 100 मेगावाट बिजली का उत्पादन डीजल से चलने वाले जेनरेटरों से करती हैं, ताकि उन्हें 24 घंटे अबाध बिजली की आपूर्ति हो सके। कंपनियों के मुताबिक, ऐसा जरूरी भी है, क्योंकि महाराष्ट्र स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड लिमिटेड मांग के अनुरूप बिजली की आपूर्ति करने में सक्षम नहीं हो पा रही है।
रिटेल और टेलिकॉम कंपनियां बिजली के लिए जेनसेट का खूब सहारा ले रही हैं। ऐसे में उनका ईधन बिल बढ़ना लाजिमी है। क्यूमिंस जेनरेशन टेक्नोलॉजीज के प्रबंध निदेशक प्रदीप भार्गव ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया कि देशभर में डीजल से चलने वाले जेनसेट की मांग 20-25 फीसदी सालाना की दर से बढ़ रही है।