सरकार ने 18 साल से ऊपर के सभी लोगों को कोविड टीके की एहतियाती खुराक या बूस्टर डोज मुफ्त में देने का निर्णय लिया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल के निर्णय के अनुसार 15 जुलाई से 75 दिनों तक कोई भी वयस्क नागरिक (18 साल या उससे ऊपर) सरकारी टीकाकरण केंद्रों पर जाकर कोविड टीके की बूस्टर खुराक मुफ्त में ले सकता है। देश की आजादी की 75वीं वर्षगांठ पर सरकार ने सभी वयस्कों को कोविड टीके की तीसरी खुराक मुफ्त में देने की घोषणा की है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने ट्वीट में कहा, ‘आजादी के अमृत महोत्सव के जश्न में 15 जुलाई से अगले 75 दिनों तक सभी सरकारी टीकाकरण केंद्रों पर 18 साल और उससे ऊपर के लोगों को मुफ्त में कोविड टीके की एहतियाती खुराक दी जाएगी।’ उन्होंने कहा कि इससे रोग से अतिरिक्त सुरक्षा मिलेगी।
सरकार के इस कदम से 18 से 59 आयु वर्ग में बूस्टर खुराक की मांग बढ़ सकती है क्योंकि अभी काफी कम लोग एहतियाती खुराक ले रहे हैं। आकड़ों से पता चलता है कि 18 से 59 आयु वर्ग के पात्र वयस्कों में से 1 फीसदी लोगों ने ही निजी टीकाकरण केंद्रों पर तीसरी खुराक ली है। लेकिन इस आंकड़े में स्वास्थ्यकर्मी और अग्रिम मोर्चे पर कार्यरत कर्मचारी शामिल नहीं हैं। 13 जुलाई तक तीसरी खुराक के लिए पात्र कुल 64 करोड़ लोगों में से 8 फीसदी लोगों ने ही एहतियाती टीका लगवाया है।
बूस्टर खुराक की अनुमति 10 अप्रैल से दी गई थी। मगर वरिष्ठ नागरिकों, स्वास्थ्यकर्मियों और अग्रिम मोर्चे पर तैनात कर्मचारियों को 10 जनवरी से ही तीसरी खुराक की इजाजत मिल गई थी। पिछले हफ्ते सरकार ने दूसरी और तीसरी खुराक के बीच का अंतराल घटाकर 6 महीने कर दिया, जो पहले 9 महीने था।
सरकार के इस कदम का मकसद टीके को बरबाद होने से रोकना भी है क्योंकि तीसरी खुराक के लिए रखे गए टीके इस साल की तीसरी तिमाही में एक्सपायर होने वाले हैं। देश में कोविड टीकाकरण में करीब 80 फीसदी हिस्सेदारी वाले कोविशील्ड टीके का दिसंबर में बना बैच सितंबर को एक्सपायर होने वाला है। कोविशील्ड की विनिर्माता सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने इसके बाद से कोविड टीका बनाना बंद कर दिया है क्योंकि उसके पुणे संयंत्र में टीके का बड़ा भंडार पड़ हुआ है। अनुमान है कि सीरम के पा कोविशील्ड की करीब 20 करोड़ खुराक हैं, जो सितंबर में एक्सपायर हो जाएंगी। यह टीका 9 महीने ही चलता है।
उधर भारत बायोटेक का कोवैक्सीन टीका 12 महीने तक चलता है। कंपनी के पास करीब 5 करोड़ खुराक पड़ी हैं और 2022 की पहली तिमाही में उसने केंद्र को टीके की आपूर्ति पूरी कर ली है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार 13 जुलाई तक कोविड टीके की करीब 10 करोड़ ऐसी खुराकें राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों के पास पड़ी हैं, जो इस्तेमाल से बच गई हैं। इनमें ज्यादार कोविशील्ड की खुराक हैं।
सभी वयस्कों को 75 दिनों तक मुफ्त एहतियाती खुराक देने से सरकारी खजाने पर 270 करोड़ से 1,600 करोड़ रुपये (टीके की मांग पर निर्भर करेगा) का बोझ पड़ सकता है। सरकार ने पिछले साल जुलाई में कोविशील्ड (215 रुपये प्रति खुराक) और कोवैक्सीन (225 रुपये प्रति खुराक) का खरीद मूल्य बढ़ा दिया था। अगर आगे भी उसी कीमत पर टीके खरीदने के लिए निविदा जारी की जाए तो बिज़नेस स्टैंडर्ड के विश्लेषण के मुताबिक 220 रुपये प्रति खुराक पर 75 दिन के टीकाकरण अभियान में 271.15 करोड़ रुपये खर्च करने पड़ सकते हैं।
टीकाकरण मौजूदा रफ्तार से हुआ तो 75 दिन में 1.23 करोड़ लोगों को तीसरी खुराक दी जा सकती है। अगर करीब 9.84 लाख टीके प्रतिदिन की उच्चतम रफ्तार से बूस्टर खुराक लगाई गई तो 75 दिन में 18 से 59 आयु वर्ग के 7.39 करोड़ लोगों को टीका लगाया जा सकता है। आम तौर पर प्रतिदिन 5 लाख लोगों को एहतियाती खुराक दी गई है, लेकिन इनमें से ज्यादातर स्वास्थ्यकर्मी, अग्रिम मोर्चे पर कार्यरत कर्मचारी और वरिष्ठ नागरिक हैं।
जुलाई के पहले हफ्ते में लोकलसर्कल्स द्वारा 15,000 से अधिक लोगों के बीच कराए गए सर्वेक्षण के अनुसार करीब 14 फीसदी लोगों ने कहा कि तीसरी खुराक मुफ्त में दी जाए तो वे टीका लगवा सकते हैं। अभी निजी केंद्रों पर तीसरी खुराक के लिए 225 रुपये देने होते हैं और टीका लगाने वाले अस्पताल को 150 रुपये प्रति खुराक का भुगतान करना होता है।