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मगर नेताओं पर कैसे हो विश्वास

Last Updated- December 07, 2022 | 1:00 PM IST

राजनीति में शुचिता और सिध्दांतों को दुनियाभर को सिखाने वाले महात्मा गांधी के देश में ही आज अजब नजारा है।


आज अगर वे जीवित होते और संसद के भीतर चल रही इस अनोखी कबड्डी को देख रहे होते तो उनके मुंह से शायद बस यही निकलता- हे राम।

अब जबकि वह तो नहीं हैं लेकिन संसद के बाहर लगी उनकी इस प्रतिमा और मंगलवार को भीतर चली राजनीतिक कबड्डी को देखकर गांधी को समझने-जानने और उनके आदर्शों को मानने वाले (जो संसद में तो नजर नहीं आए) लोग तो कम से कम बेसाख्ता यह ही कहेंगे।

वह यूं कि सरकार को बचाने या गिराने की कवायद में क्या दल और क्या नेता, राजनीति के हमाम में कमोबेश सब नंगे नजर आए। आइए देखते हैं, विश्वास प्रस्ताव के नाम पर हुई इस शर्मनाक नौटंकी में जनता के विश्वास को कैसे ठगा देश के नेताओं और दलों ने…

सांसद बिकता है, बोलो…

भारतीय संसदीय इतिहास में पहली बार जबरदस्त नाटकीय घटनाक्रम में एक विपक्षी सदस्य ने लोकसभा में नोटों की गड्डियों का ढेर पेश कर सनसनी मचा दी। मध्य प्रदेश की मुरैना संसदीय सीट से भाजपा के सांसद अशोक अरगल  गड्डियां काले बैग में सदन में लेकर आए। उनके पीछे एक अन्य सांसद दूसरे बैग में रुपये लेकर पहुंचे। सभी नोट एक हजार के थे।

अरगल ने आरोप लगाया कि एक करोड़ रुपये बतौर एडवांस समाजवादी पार्टी के एक नेता ने दिए हैं। बाद में सभी को तीन-तीन करोड़ रुपये देने का वादा किया गया था। बीजद सांसद अर्चना नायक ने दावा किया कि उन्हें प्रमुख कांग्रेसी नेताओं की ओर से नकद राशि और पार्टी टिकट देने की पेशकश की गई थी।

हंगामा है क्यों बरपा…

भाजपा सांसदों ने नोटों की गड्डी सदन में उछाली। इसके बाद सदन में हंगामा मच गया और सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी गई।

राहुल के भाषण के बीच बसपा सदस्यों के हंगामे की वजह से राहुल भाषण पूरा नहीं कर पाए और सदन की कार्यवाही करीब एक घंटे के लिए स्थगित करनी पड़ी।

भाजपा नेता विजय मल्होत्रा पर जेल में आकर सरकार के खिलाफ मत देने के राजद नेता पप्पू यादव के आरोप के बाद भारी हंगामे के कारण कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित करनी पड़ी।

बसपा और सपा सांसदों के बीच तीखी झड़पें हुईं, जिसकी वजह से सदन की कार्यवाही कई बार स्थगित हुई।

तू चोर, मैं सिपाही

समाजवादी पार्टी के नेता अमर सिंह ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने उनकी पार्टी के छह सांसदों को महत्वपूर्ण विश्वास मत से पहले दिल्ली के उत्तर प्रदेश भवन में जबरन पकड़ रखा है। विश्वास प्रस्ताव पर बहस के दौरान बसपा नेता ब्रजेश पाठक ने सरकार के पक्ष में मतदान के लिए पार्टी पर दबाव बनाने के लिए सीबीआई के दुरुपयोग का आरोप लगाया। पाठक ने कहा कि सीबीआई की ओर से मायावती को जेल में डालने की धमकी दी जा रही है।  

राजद सांसद पप्पू यादव ने भाजपा नेता विजय कुमार मल्होत्रा पर आरोप लगाया कि वह उनसे तिहाड़ जेल मिलने आए थे और विश्वास प्रस्ताव के खिलाफ मत देने को कहा था। भाजपा नेता विजय कुमार मल्होत्रा और अनंत कुमार ने आरोप लगाया कि उनके कुछ सदस्यों को हवाई अड्डे के भीतर घुसने नहीं देने का केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री की ओर से निर्देश दिया गया है ताकि सांसद मतदान में हिस्सा लेने न पहुंच सके।

घर का भेदी, लंका ढाए…

परमाणु करार को समझ न पाने की अपनी ‘व्यथा’ बताते हुए समाजवादी पार्टी के बागी और कुख्यात सांसद अतीक अहमद ने कहा कि वह सरकार के खिलाफ वोट देंगे।
भाजपा के बागी नेता सोमाभाई पटेल ने ऐलान किया कि वह सरकार के समर्थन में मतदान करेंगे।
अकाली दल के सांसद यूपीए के खिलाफ न जाने का ऐलान किया। वोटिंग के दौरान बाहर रहने का तरीका अपनाया।
शिवसेना सांसद तुकाराम ने भी सरकार के खिलाफ वोट न देने का ऐलान किया।
टीडीपी के सांसद अधिकेश्वर ने भी यूपीए का ही खेमा पकड़ा।  

दीवाना सैकड़ों में पहचाना जाएगा…

फिल्मी गानों से भरपूर मनोरंजन रेल मंत्री लालू प्रसाद के अलावा शायद कोई और कर भी नहीं सकता था। लिहाजा करार, सरकार और तकरार के थ्रिल के बीच कॉमेडी का रंग भी नजर आया और संसद में जोरदार ठहाके लगते रहे। मसलन, जब वामपंथी दलों के साथ संप्रग के रिश्तों को लेकर उन्होंने एक गीत कुछ फेरबदल के साथ गाया – चार साल पहले हमें तुमसे प्यार था, आज भी है और कल भी रहेगा।

फिर भाजपा के साथ मतदान करने के लिए वाम दलों को आगाह करते हुए उन्होंने गाना सुनाया- तुम अगर मुझको न चाहो तो कोई बात नहीं तुम किसी और को चाहोगी तो मुश्किल होगी। लालू यहीं नहीं रुके वाम दलों को नसीहत देते हुए कहा- ओ दूर के मुसाफिर …. उधर से इधर आ जा।

First Published - July 23, 2008 | 12:03 AM IST

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