सरकार की ओर से पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की दामों में अब तक की सबसे बड़ी बढ़ोतरी का उद्योग जगत स्वागत किया है।
उनका मानना है कि ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी और शुल्क कटौती के फैसले से भारी नुकसान झेल रही तेल विपणन कंपनियों को कुछ राहत मिलेगी। शीर्ष उद्योग चेंबरों ने कहा कि कच्चे तेल के अंतरराष्ट्रीय दामों में जबर्दस्त बढ़ोतरी के बाद सारा बोझ तेल विपणन कंपनियों पर न होकर सभी संबध्द पक्षों पर होना चाहिए।
कच्चे तेल की कीमत हाल ही में 135 डॉलर प्रति बैरल को पार कर गई थी। एसोचैम के नवनियुक्त अध्यक्ष सज्जन जिन्दल ने एक बयान में कहा कि अब समय आ गया है कि सभी संबध्द पक्ष तेल कीमतों में बढ़ोतरी का बोझ बांटें। उन्होंने राजनीतिक दलों से भी अपील की कि वे मूल्य संशोधन के फैसले का समर्थन करें।
वहीं फिक्की ने कहा, कि बढ़ती तेल कीमतों का बोझ सभी संबध्द पक्षों में बांटने से सुनिश्चित हो सकेगा कि रिटेल उपभोक्ताओं पर इसका सीधा प्रभाव सीमित रहे। दूसरी ओर सीआईआई के अध्यक्ष के वी कामथ ने कहा कि कीमतों में बढ़ोतरी आवश्यक हो गई थी और इसे और रोक पाना मुमकिन नहीं था। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग को देखते हुए सरकार के पास मूल्य वृद्धि के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा था।