कम्युनिकेशंस कंपनी में काम करने वाले वरिष्ठ अधिकारी दीपक कुलकर्णी ने हाल ही में शोरूम में चमचमाती कार देख उसे खरीदने का मन बनाया।
इसके लिए उन्होंने बैंक से लोन लेने के लिए निजी क्षेत्र के दो बैंकों से संपर्क किया। दोनों ही बैंकों में उनसे तमाम कागजातों पर हस्ताक्षर करने को कहा गया। इनमें से एक कागज था सरेंडर लेटर, जिसे देख वे चकित रह गए। उन्होंने लोन एजेंट से कहा कि जब उन्हें लोन मिला ही नहीं है, तो फिर सरेंडर लेटर पर साइन क्यों कराया जा रहा है। बैंक एजेंट ने कहा कि ऐसा सभी करते हैं।
हालांकि कुलकर्णी ने इस पर हस्ताक्षर करने से साफ मना कर दिया, तब बैंक एजेंट ने कहा कि उन्हें लोन नहीं मिल सकता। ऐसा वाक्या सिर्फ कुलकर्णी के साथ ही नहीं हुआ, बल्कि तमाम लोग जाने-अनजाने सरेंडर लेटर पर साइन करते हैं, जो मना कर देते हैं, उन्हें लोन नहीं मिल पाता है। बैंकिंग उद्योग से जुड़े सूत्रों का कहना है वाहन लोन देने वाले लगभग सभी बैंक डिफॉल्ट की स्थिति से बचने के लिए इस तरह के हथकंडे अपना रहे हैं। हां, कुछ बैंकों में इसका फॉर्मेट जरूर अलग-अलग होता है।
दरअसल, जब भी कोई व्यक्ति वाहन लोन लेता है, तो उससे सादे सरेंडर कागज पर साइन करा लिया जाता है औैर जब वह कुछ किस्तें बैंक को नहीं दे पाता है, तो बैंक सरेंडर कागज को आधार बनाकर संबंधित एजेंसी को कार वापस लेने को कहता है। प्राइवेट सेक्टर बैंक के एक वकील ने बताया कि बहुत से आवेदकों को इसका पता भी नहीं चल पाता कि उससे सरेंडर लेटर पर साइन कराया गया है, क्योंकि आवेदकों से तमाम तरह के कागज साइन कराए जाते हैं।
यही नहीं, सरेंडर लेटर की फोटो प्रति भी लोन लेने वाले को नहीं दी जाती है, जबकि लोन एग्रीमेंट से संबंधित अन्य कागजातों की फोटो प्रति लोने लेने वालों को मुहैया कराई जाती है। जो बैंक ऐसा कर रहे हैं, वह रिजर्व बैंक के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन कर रहे हैं, क्योंकि उसमें कहा गया है कि लोन लेते समय, जितने भी कागजातों पर हस्ताक्षर कराया जाए, उसकी फोटो प्रति आवेदक को सौंपना जरूरी है। वाहन लोन देने वाले बैंक के एक अधिकारी से जब इस बारे में पूछा गया, तो उन्होंने इस तरह के किसी भी कागजात पर साइन कराने की बात को सिरे से खारिज कर दिया।
लेकिन जब उन्हें सरेंडर लेटर ई-मेल किया गया, तो उन्हें इसे पॉलिसी मैटर बता कर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। कुछ बैंकों ने इस कवायद को डिफॉल्ट की स्थिति से बचने के लिए हेजिंग का नाम दिया। कंज्यूमर एक्टिविस्ट जहांगीर गई ने बताया कि इस तरह के कागजात कानूनी रूप में इस्तेमाल नहीं किए जाते हैं, लेकिन इससे लोन लेने वालों पर मनोवैज्ञानिक दबाव जरूर बनाया जाता है, जोकि सरासर गलत है।
वाहन लोन लेने वालों से सरेंडर लेटर पर कराया जाता है हस्ताक्षर
बैंक कर रहे रिजर्व बैंक के निर्देशों का उल्लंघन