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ऊंची कीमतों पर बिजली खरीदना किसी समस्या का हल नहीं हो सकता

Last Updated- December 07, 2022 | 2:04 AM IST

एनटीपीसी लिमिटेड के अध्यक्ष का पद संभाले हुए आर एस शर्मा को करीब एक महीने हुए हैं। पिछले साल करीब 34,000 करोड़ रुपये का सेल्स अर्जित करने वाली इस नवरत्न कंपनी के लिए शर्मा एक नए कॉरपोरेट प्लान बनाने पर विचार कर रहे हैं।


हालांकि, उत्पादन क्षमता में विकास का उनका कोई इरादा नहीं है। बिजनेस स्टैंडर्ड के सुधीर पाल सिंह और वंदना गोम्बर ने उनसे बातचीत की। पेश हैं इस बातचीत के मुख्य अंश:

शुरुआत अतिरिक्त उत्पादन क्षमता से करते हैं। 11वी पंचवर्षीय योजना के तहत बिजली उत्पादन क्षमता में 22,430 मेगावॉट की बढ़ोतरी करना है, क्या इसके लिए ऑर्डर का काम पूरा हो चुका है?

अब तक हम 16,690 मेगावॉट के लिए ऑर्डर दे चुके हैं, जबकि 3,760 मेगावॉट के लिए ऑर्डर देने का काम सितंबर तक पूरा किया जाना है। हमें विश्वास है कि 11वी योजना तक हम 22,430 मेगावॉट बिजली उत्पादन के अपने लक्ष्य को पूरा कर पाएंगे। हालांकि, ऑर्डर देना इस ओर सिर्फ एक कदम बढ़ाने जैसा है। हम परियोजना पर ऑनलाइन निगाह रख पाएं इसके लिए हम नई तकनीक विकसित करने पर भी विचार कर रहे हैं।

पिछले एक महीने के दौरान आपके सामने जो सबसे बड़ी चुनौती आई वह क्या है?

ऊर्जा क्षेत्र में हमारे सामने जो अवसर हैं उन्हें पाना खुद किसी चुनौती से कम नहीं है। बिजली की कमी से निपटना खुद अपने आप में एक बड़ी चुनौती है। उन्हें पूरा क्यों नहीं किया जा सकता? हमें उन्हें पूरा करने के लिए कौन सी तकनीकों की मदद लेनी चाहिए, ये सोचना भी एक बड़ी चुनौती है।

एनटीपीसी ने कई क्षेत्रों में अपने पैर फैलाए हैं। इसकी दखल जलविद्युत, ट्रेडिंग, कोल माइनिंग और उपकरण उत्पादन के क्षेत्र में भी है। क्या आपको लगता है कि कुछ गलतियां भी हुई हैं, जैसे वितरण क्षेत्र में।

नहीं ऐसा नहीं है। मुझे लगता है कि वैविधीकरण से हमें फायदा ही हुआ है। हमें इतना सक्षम होना चाहिए कि हम विभिन्न ईंधन स्त्रोतों से ग्रिड को ऊर्जा प्रदान कर सकें।

क्या आपकी नजर सीमेंट क्षेत्र पर भी है?

हम फ्लाई ऐश का उत्पादन कर रहे हैं। हम इसके लिए किसी सीमेंट कंपनी के साथ साझेदारी पर भी विचार कर रहे हैं।

एनटीपीसी महंगे कोयले और एलएनजी का आयात कर रहा है। क्या इससे बिजली उत्पादन का खर्चा बढ़ेगा?

नहीं ऐसा नहीं है। अगर हमारी खपत करीब 12 करोड़ टन घरेलू कोयले की है और हम केवल 50 लाख टन कोयले का आयात करते हैं तो इससे सकल बिजली उत्पादन पर कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा। आयातित कोयले और गैस का अनुपात कुल खपत की तुलना में काफी कम है, यहां यह बात महत्वपूर्ण है।

पर क्या आपको ऐसा लगता है कि चूंकि ऊंची दर पर बिजली खरीदने को भी लोग तैयार हैं तो आप महंगे कोयले और गैस का आयात कर सकते हैं?

किसी भी कीमत पर बिजली खरीदने से आपकी समस्या का समाधान नहीं होगा। अगर आप ऐसा करते आप अपने पैरों पर ही कुल्हाड़ी मार रहे हैं। इससे आपकी संपत्तियां बेकार और निष्क्रिय पड़ी रहती हैं।इसी वजह से आंध्र प्रदेश में कई संपत्तियां निष्क्रिय पड़ी हैं।

First Published - May 28, 2008 | 11:04 PM IST

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