उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के दिशानिर्देशों के बाद किसी ब्रांड का विज्ञापन करने वाले फिल्मी सितारों और मशहूर हस्तियों को अब सतर्क रहना होगा। इन दिशानिर्देशों में स्पष्ट कर दिया गया है कि अगर मशहूर हस्तियां किसी उत्पाद का प्रचार करती हैं तो पहले आवश्यक जांच-पड़ताल की प्रक्रिया पूरी की जानी चाहिए।
जहां तक विज्ञापन उद्योग की बात है तो उत्पादों को लेकर भ्रामक दावे सामने आते रहे हैं। नियामक और उपभोक्ता दोनों ही ब्रांडों द्वारा किए जा रहे भ्रामक दावों से जूझ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि मगर अब नए दिशा निर्देश आने के बाद सूरत काफी हद तक बदल जाएगी।
यह पहली बार नहीं हुआ है कि जब उन विज्ञापनों पर सवाल उठे हैं जिनमें कंपनियां अपने उत्पादों की बिक्री बढ़ाने के लिए मशहूर हस्तियों का सहारा लेती हैं। 2019 में सरकार ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम जारी किया था। इस अधिनियम में कहा गया था कि अगर कोई मशहूर हस्ती किसी उत्पाद का विज्ञापन करती है तो उसे जवाबदेही भी लेनी होगी।
इस अधिनियम में केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीजीपीए) का गठन किया गया है जो ऐसे मामलों का नियमन करता है। अधिनियम में उत्पादों के संबंध में झूठे दावे करने के लिए 10-50 लाख रुपये जुर्माने से लेकर पांच वर्ष तक के कारावास की सजा का प्रावधान है। इसमें किसी मशहूर हस्ती को एक वर्ष तक विज्ञापन करने से रोका जा सकता है। बार-बार ऐसे मामले सामने आने पर यह अवधि तीन वर्ष तक के लिए बढ़ाई जा सकती है।