केंद्र सरकार होटल अशोक को परिचालन-रखरखाव-विकास (ओएमडी) मॉडल के जरिये 60 साल के लिए लाइसेंस पर देगी। साथ ही केंद्र सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के जरिये होटल अशोक की अतिरिक्त जमीन को वाणिज्यिक विकास और लक्जरी सर्विस अपार्टमेंट के लिए इस्तेमाल कर कमाई करेगा।
सम्राट होटल को भारतीय पर्यटन विकास निगम (आईटीडीसी) अपने पास रखेगा। सम्राट होटल को एक चारदीवारी होटल अशोक से अलग करती है। आईटीडीसी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी है और अशोक होटल तथा सम्राट होटल की मालिक है। सरकार अपने सलाहकारों के जरिये सोमवार को एक रोडशो आयोजित करेगी। इसमें आईटीडीसी की संपत्तियों से कमाई के प्रस्तावित मॉडलों पर बाजार भागीदारों की प्रतिक्रिया ली जाएगी।
इस प्रस्ताव को कैबिनेट सचिव की अगुआई वाले सचिवों के मुख्य समूह ने मंजूरी दी है। यह भी पता चला है कि आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीईए) ने आईटीडीसी के होटल अशोक-सम्राट परिसर की संपत्ति को चार भागों में बांटने को मंजूरी दे दी है। इनमें सम्राट होटल, होटल अशोक को कमाई का स्रोत बनाना, सर्विस अपार्टमेंट के लिए 6.3 एकड़ भूखंड और वाणिज्यिक विकास के लिए 1.8 एकड़ भूमि शामिल है।
इस प्रस्ताव के मुताबिक 11 एकड़ में फैले अशोक होटल को ओएमडी मॉडल के जरिये पट्टे पर दिया जाएगा, जिसमें निजी साझेदार को इस संपत्ति के नवीनीकरण की मंजूरी होगी। निजी साझेदार को होटल परिसर में सुविधाओं को नया जामा पहनाना होगा, जिस पर 450 करोड़ रुपये खर्च हो सकते हैं। माना जा रहा है कि इसके जरिये होटल अशोक को रिट्ज पेरिस, दी सेवॉय होटल लंदन, वाल्डोर्फ एस्टोरिया न्यूयॉर्क और ताजमहल पैलेस मुंबई जैसे अंतरराष्ट्रीय विरासत वाले होटलों की तर्ज पर स्थापित किया जाएगा।
निजी उद्यमी इस होटल का परिचालन करेगा। इसमें 550 कमरे, करीब 2 लाख वर्ग फुट खुदरा एवं कार्यालय स्थान, करीब 30,000 वर्ग फुट बैंक्वेट एवं सम्मेलन सुविधाएं और करीब 25,000 वर्ग फुट के आठ रेस्तरां शामिल हैं।
एक अधिकारी ने कहा कि सरकार प्रस्तावित मॉडलों पर बाजार भागीदारों की प्रतिक्रिया लेगी और उसके मुताबिक ही अंतिम योजना का ढांचा बनाएगी। होटल अशोक के पास 6.3 एकड़ का भूखंड प्रीमियम सर्विस अपार्टमेंट की करीब 600 से 700 इकाइयों के लिए प्रस्तावित किया जा रहा है। इनसे डिजाइन, बिल्ड, फाइनैंस, ऑपरेट ऐंड ट्रांसफर (डीबीएफओटी) मॉडल के जरिये कमाई की जाएगी। इस संपत्ति के लिए लाइसेंस की अवधि 90 से 99 साल प्रस्तावित है। निजी साझेदार को सुविधाओं की डिजाइनिंग एवं विकास करना होगा, रकम जुटानी होगी और प्राधिकरण को भुगतान करना होगा।
इसके पास एक अन्य 1.83 एकड़ का भूखंड लक्जरी खुदरा एवं कार्यालय विकास के लिए प्रस्तावित है, जिससे भी पीपीपी-डीबीएफओटी मोड के जरिये कमाई की जाएगी। पांच-छह मंजिला एकीकृत इमारत के लिए पट्टे की अवधि 90 से 99 साल होगी। निजी भागीदार सुविधाएं डिजाइन एवं विकसित करनी होंगी, कर्ज लेना होगा और अथॉरिटी को सालाना लाइसेंस फीस का भुगतान करना होगा। वाणिज्यिक विकास और सर्विस अपार्टमेंट के लिए प्रस्तावित दोनों भूखंडों में विकास से संबंधित बंदिशें होंगी क्योंकि भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण ने आसपास के क्षेत्र में ऊंचाई पर प्रतिबंध लगाए हैं।