देश में तैयार किया गया मानव पैपिलोमावायरस (एचपीवी) का टीका जल्द ही देश के राष्ट्रीय टीकाकरण मिशन का हिस्सा बन सकता है। इस वायरस की वजह से कैंसर भी होता है। टीकाकरण पर आधारित राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी सलाहकार समूह की स्थायी उप-समिति ने इसे केंद्रीय टीकाकरण अभियान में शामिल करने की सिफारिश पहले ही की है। सूत्रों के अनुसार ये टीके पहले 9 से 14 वर्ष की लड़कियों को दिए जा सकते हैं। इस टीके से जुड़ी जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने बताया, ‘शुरुआत में ये टीके सिर्फ लड़कियों को दिए जाएंगे लेकिन बाद में इसे लड़कों को भी लगाया जाएगा। देश में टीका तैयार करने की वजह से कीमत कोई बड़ी बाधा नहीं बनेगी।’
पुणे की कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया को इस हफ्ते की शुरुआत में देश के औषधि नियामक से इसके लिए मंजूरी मिली है। टीके की कीमत के बारे में सीरम इंस्टीट्यूट ने कोई जानकारी नहीं दी है लेकिन कंपनी का कहना है कि इस साल के अंत तक टीके बाजार में आ सकते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि ये टीके यौन संबंध बनाने से पहले 26 साल तक की लड़कियों को दिए जा सकते हैं ।
इस समय बाजार में दो एचपीवी टीके मौजूद हैं जिनका निर्माण विदेशी कंपनियों द्वारा होता है। इनमें एक टीका गार्डसिल है जिसे मर्क तैयार करती है जबकि दूसरी सर्वेरिक्स है जिसे ग्लैक्सो स्मिथक्लाइन तैयार करती है। इस वक्त बाजार में एचपीवी वैक्सीन की कीमत लगभग 2,000 रुपये से 3,000 रुपये प्रति खुराक है। उम्मीद है कि सीरम के इस क्षेत्र में उतरने से कीमतें कम होंगी। राष्ट्रीय टीकाकरण अभियान में इस टीके को शामिल करना, महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर की समस्या को कम करने की दिशा में यह अहम कदम साबित हो सकता है। देश में महिलाओं को होने वाले कैंसर में सर्वाइकल कैंसर दूसरे स्थान पर है। इस समय पूरे देश में लगभग 5 फीसदी महिलाएं इस बीमारी से जूझ रही हैं और उन्हें एचपीवी-16/18 संक्रमण होता है। वहीं करीब 83 फीसदी सर्वाइकल कैंसर में एचपीवी 16 या 18 का संक्रमण होता है। एचपीवी संक्रमण सर्वाइकल कैंसर का सबसे बड़ा कारण है और पूरी दुनिया में लगभग 70 फीसदी सर्वाइकल कैंसर के लिए एचपीवी 16 और 18 संक्रमण ही कारक बनता है। भारत में 48.35 करोड़ से अधिक महिलाओं की आबादी है जिनमें से 15 साल या इससे अधिक उम्र की लड़कियों और महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर का खतरा है। मौजूदा आंकड़े संकेत देते हैं कि हर साल लगभग 1,23,907 महिलाओं में सर्वाइकल की समस्या पाई गई है और इस बीमारी के चलते 77,438 महिलाओं की मौत हो गई। देश में सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में सबसे ज्यादा फैलने वाले कैंसर में दूसरे स्थान पर है वहीं 15 से 44 साल की महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर की समस्या दूसरे स्थान पर है।