औषधि तकनीकी परामर्श बोर्ड (डीटीएबी) ने कोडीन से बनने वाली दवाओं पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की है और अब देश का औषधि नियामक इस मामले पर अंतिम फैसला करेगा। कई सूत्रों ने यह जानकारी दी। आजकल खांसी और सर्दी के बाजार में लगभग 8 फीसदी दवाओं में कोडीन का उपयोग किया जाता है और अगर इसपर प्रतिबंध लगाया गया तो लगभग 43 करोड़ रुपये का प्रभाव पड़ सकता है।
कोडीन आधारित फॉर्म्युलेशन का उपयोग मादक उत्पाद के रूप में दुरुपयोग के लिए भी किया जाता है, जिसके कारण यह जांच के दायरे में भी है। कई तस्करी रैकेट का भंडाफोड़ किए जाने पर कोडीन फॉर्म्युलेशन (ज्यादातर कफ सिरप) जब्त किए गए हैं। बहुत से लोग ओपॉइड उत्पाद होने के कारण नशा करने के लिए इस दवा का दुरुपयोग करते हैं।
इस मामले पर चर्चा करने के लिए डीटीएबी की 26 सितंबर को बैठक की गई और इस उद्योग से जुड़े कई सूत्रों ने पुष्टि की कि बैठक में कोडीन आधारित फॉर्म्युलेशन पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की गई है। एक उद्योग सूत्र ने कहा कि डीटीएबी ने कोडीन आधारित फॉर्म्युलेशन पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की है। अब भारतीय औषधि महानियंत्रक (डीजीसीआई) प्रतिबंध को लेकर फैसला लेगा। फार्मा उद्योग ने पहले ही इस मामले पर सरकार को एक आवेदन पत्र देकर कोडीन पर प्रतिबंध नहीं लगाने पर विचार करने का अनुरोध किया है।
उनका दावा है कि यह आज उपलब्ध सर्वोत्तम एंटीट्यूसिव (सर्दी की दवा) में से एक है। इंडियन ड्रग मैन्युफैक्चरर्स असोसिएशन (आईडीएमए) के महासचिव दारा पटेल ने कहा कि सरकार को ऐसी कोई कार्रवाई नहीं करनी चाहिए क्योंकि ऐसी दवाएं चिकित्सकीय रूप से सुरक्षित हैं।
उन्होंने कहा कि उन्होंने इस मामले में केंद्र को पत्र लिखा है। आईडीएमए ने कफ सिरप की बरामदगी और कोडीन फॉस्फेट की खपत को लेकर 2019 से 2021 तक नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) से जब्ती के आंकड़ों का हवाला दिया है। आईडीएमए पत्र ने एनसीबी डेटा का हवाला देते हुए कहा कि उदाहरण के लिए 2021 में एनसीबी द्वारा कोडीन आधारित कफ फॉर्म्युलेशन की 9,50,000 बोतलों को जब्त किया गया था, जिसकी मात्रा लगभग 9.5 किलोग्राम थी। उस वर्ष भारत में कोडीन फॉस्फेट की कुल खपत 55,620 किलोग्राम थी।
आईडीएमए ने कहा, हम यह भी बताना चाहते हैं कि नैशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ ऐंड न्यूरोसाइंसेज, बेंगलूरु में किए गए एक अध्ययन के आंकड़ों से पता चला है कि शराब से संबंधित चीजों में कोडीन का 21 फीसदी दुरुपयोग होता है, जबकि, इसकी तुलना में 0.7 फीसदी अध्ययन के नमूनों में कोडीन का दुरुपयोग होता है। आईडीएमए ने केंद्र से दुरुपयोग के कारण उत्पाद पर प्रतिबंध नहीं लगाने का अनुरोध किया।
शोध और विश्लेषण फर्म अवाक्स की अध्यक्ष (विपणन) शीतल सापले ने कहा कि वर्तमान में, कुल खांसी और सर्दी के बाजार में कोडीन फॉर्म्युलेशन का लगभग 8 फीसदी उपयोग किया जाता है। उन्होंने कहा कि कोडीन पर प्रतिबंध से इसके बाजार पर लगभग 43 करोड़ रुपये का प्रभाव पड़ेगा। इस बाजार में कई शीर्ष व्यापारियों के अपने प्रमुख ब्रांड हैं। उद्योग के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि कोडीन आधारित कफ फॉर्म्युलेशन करने वाली फार्मा कंपनियां दुरुपयोग को रोकने के लिए कदम उठा रही हैं। बड़ी मात्रा में ड्रग रैकेट तक पहुंचने वाले कफ सिरप की जांच करने के लिए फार्मा कंपनियां निगरानी में सुधार कर रही हैं। एक फार्मा कंपनी के मुख्य कार्याधिकारी ने नाम न छापने का अनुरोध पर बताया कि उन्होंने क्यूआर कोड ट्रेसिंग शुरू कर दी है। कंपनी व्यापार के लिए भेजे जाने वाले बैच को अन्य सिरप वाली दवाओं की तुलना में लगभग आधा कर दिया है । इससे उत्पादों पर करीब से निगरानी की जा सकती है।
कोडीन अफीम का एक उप-उत्पाद है, जिसे भारत में सख्त शर्तों के तहत संसाधित किया जाता है। जुलाई में, सरकार ने पहली बार एक निजी कंपनी, बजाज हेल्थकेयर को, अफीम संसाधित करने की अनुमति दी थी। अफीम को संसाधित करके दर्द निवारक, कफ सिरप और कैंसर की दवाओं को बनाने के लिए उपयोग किए जाने वाले एल्कलॉइड को निकाला जाता है।
उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में दो सरकारी कारखाने एल्कलॉइड निकालने के लिए प्रति वर्ष लगभग 800 टन अफीम गोंद का प्रसंस्करण करते हैं। लेकिन बजाज हेल्थकेयर के साथ यह शर्त रखी गई कि यह अफीम का प्रसंस्करण करने के बाद इसे सरकार को वापस देगी। सरकार इसे बाद में उद्योग को बेच सकती है।