विद्युत नियामक आयोगों (ईआरसी) के संयुक्त शीर्ष निकाय फोरम ऑफ रेगुलेटर्स (फॉर) ने प्रस्तावित विद्युत (संशोधन) विधेयक, 2022 को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना की। फॉर ने विधेयक के लिए आयोजित विशेष बैठक में कहा कि केंद्र सरकार के इस कदम से ऊर्जा क्षेत्र के कामकाज में बाधा उत्पन्न होगी।
फॉर ने टिप्पणी की,’ भारत के संविधान की समवर्ती सूची में विद्युत आता है। इसलिए राज्य और केंद्र सरकार पर इस क्षेत्र के विकास की जिम्मेदारी है। इस लिहाज से विद्युत अधिनियम, 2003 में राज्य और केंद्र सरकार की भूमिका और जिम्मेदारियों को लेकर बेहतर ढंग से सामंजस्य स्थापित किया गया था। हालांकि इस अधिनियम में कई प्रस्तावित संशोधन सामंजस्य का झुकाव केंद्र सरकार की ओर कर देंगे।’
फॉर की यह टिप्पणी ऊर्जा की स्थायी समिति के सुपुर्द कर दी गई है। ऊर्जा की स्थायी समिति विद्युत विधेयक, 2022 पर साझेदारों के साथ चर्चा कर रही है। इस विधेयक के लिए फॉर की विशेष बैठक की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (यूपीईआरसी) ने की। फॉर की बैठक आमतौर पर अध्यक्षता केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग (सीईआरसी)करता है लेकिन सीईआरसी की अनुपस्थिति में उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (यूपीईआरसी) ने इस बैठक की अध्यक्षता की।
फॉर ने कहा कि विद्युत अधिनियम, 2003 का एक ध्येय यह कि शुल्क निर्धारित करने की प्रक्रिया से सरकार को दूर किया जाए। इसलिए नियामकीय आयोग का गठन सुनिश्चित हुआ था। इस क्रम में केंद्र और राज्य स्तर पर नियामक गठित किए गए थे। इन आयोगों ने इस क्षेत्र के लिए नियामक की भूमिका निभाई।
फॉर का अनुमान है, ‘ इस प्रस्तावित विधेयक में विद्युत विधेयक के मूल आधार को खत्म किया जा रहा है। प्रस्तावित विधेयक में कई नियामकीय गतिविधियों के लिए केंद्र सरकार के हस्तक्षेप का सुझाव दिया गया है। इससे इस क्षेत्र में भ्रम की अपरिहार्य स्थिति पैदा हो सकती है। ऊर्जा क्षेत्र के सुचारु रूप से कार्य करने के लिए इन संशोधनों को त्याग दिया जाना चाहिए जो आदर्श स्थिति भी होगी।’
फॉर ने विभिन्न धाराओं के लिए की गई सिलसिलेवार टिप्पणी में कहा कि नियामक को कानून बनाने चाहिए और यह कार्य केंद्र सरकार को नहीं करना चाहिए। इसके मुताबिक कुछ धाराओं के जरिए ऊर्जा के वितरकों के लिए रास्ता खोला गया है ताकि वे निजी निवेश कर सकें। ये धाराएं विवाद समाधान के तरीके और दंड के प्रावधानों से भी संबंधित हैं। दस्तावेज के मुताबिक हाल में विद्युत अधिनियम, 2003 में संशोधन के लिए केंद्र सरकार और केंद्र सरकार की एजेंसियों को अधिक शक्तियां दे दी गई हैं।