सिंगुर मसले पर गतिरोध खत्म होता नहीं दिख रहा है। मंगलवार को टाटा मोटर्स की ओर से राज्य सरकार को फिर चेतावनी दी गई कि नैनो संयंत्र और कल-पुर्जा इकाइयों के लिए पहले किए गए समझौते से सरकार पीछे न हटे।
सच तो यह है कि टाटा राज्य सरकार से पूर्व में किए गए समझौते में किसी तरह का फेरबदल नहीं चाहते हैं। टाटा मोटर्स की ओर से यह बयान तृणमूल और कांग्रेस और राज्य सरकार के बीच हुए समझौते के बाद आया है, जिसमंह कहा गया कि प्रभावित किसानों को नैनो संयंत्र के 997 एकड़ जमीन में से उन्हें कुछ हिस्सा वापस किया जाएगा।
दूसरी ओर, राज्य सरकार टाटा को मनाने की तैयारी में जुटी हुई है, ताकि वह नैनो संयंत्र में काम शुरू कर दें। इसी के तहत राज्य के वाणिज्य और उद्योग मंत्री निरुपम सेन ने बताया कि हमने टाटा को फिर से भरोसा दिलाया है कि मुख्य परियोजना स्थल से कोई जमीन वापस नहीं ली जाएगी और राज्य सरकार चाहती है कि नैनो कार सिंगुर से ही निकले।
सेन ने कहा कि राजभवन में द्विपक्षीय बातचीत के दौरान सरकार कभी भी विपक्षी तृणमूल कांग्रेस की मांग पर राजी नहीं हुई। सेन ने कहा कि हम प्रभावित लोगों को जमीन देने के लिए संभावनाएं तलाशने के लिए राजी हो गए थे। उन्होंने कहा कि मैं सभी संबद्ध पक्षों से अपील करता हूं कि टाटा को सिंगुर संयंत्र शांतिपूर्ण तरीके से शुरू और संचालित करने दें।
सेन ने बताया कि टाटा मोटर्स को यह आश्वस्त किया गया है कि संयंत्र की जमीन वापस नहीं ली जाएगी और काम शुरू करने में कंपनी को कोई परेशानी नहीं आने दी जाएगी। इस बीच, तृणमूल कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल सरकार से मांग की कि ‘अनिच्छुक किसानों’ को टाटा मोटर्स के सिंगुर स्थित परियोजना स्थल के भीतर ही 300 एकड़ भूमि दी जानी चाहिए। तृणमूल कांग्रेस के विधायक रविंद्रनाथ भट्टाचार्य ने कहा कि हमने परियोजना क्षेत्र के भीतर ही जमीन की मांग की है।