विश्वास मत में मनमोहन सिंह सरकार ने भले ही जीत हासिल कर ली हो, लेकिन इस जीत से विपक्षी दलों में खलबली मच गई है।
माकपा नेतृत्व की ओर से बार-बार कहे जाने के बाद भी पद लोकसभा अध्यक्ष पद नहीं छोड़ना सोमनाथ चटर्जी को महंगा पड़ गया। पार्टी ने अनुशासनहीनता का आरोप लगाते हुए सोमनाथ चटर्जी को बाहर का रास्ता दिखा दिया है।
पार्टी व्हिप का उल्लंघन कर सरकार के पक्ष में मतदान करने और गैर-हाजिर रहने वाले अपने आठ सांसदों को भाजपा ने पार्टी से निलंबित कर दिया है। पार्टी पोलित ब्यूरो के सदस्य बिमान बोस ने बताया कि सोमनाथ चटर्जी ने पार्टी अनुशासन का उल्लंघन किया है। ऐसे में उन्हें पार्टी से बर्खास्त करने का फैसला लिया गया।
उन्होंने कहा कि माकपा में कोई भी पार्टी से बड़ा नहीं है। उधर, वरिष्ठ भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी के घर पर हुई बैठक के बाद पार्टी ने सरकार के पक्ष में वोट देने वाले पांच सांसदों और मतदान में हिस्सा नहीं लेने वाले तीन सांसदों को पार्टी से निलंबित करने का फैसला सुनाया। हालांकि गंभीर रूप से बीमार डी.सी. श्रीकांतप्पा के मतदान में भाग नहीं ले पाने की वजह से उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है। आडवाणी ने कहा कि अगर ये सांसद पार्टी व्हिप का उल्लंघन नहीं करते तो सरकार की पराजय तय थी।
इसके साथ ही एमडीएमके ने कहा कि संसद में विश्वास मत के समर्थन में पार्टी व्हिप के विरुद्ध मतदान करने वाले अपने दो सांसदों को अयोग्य ठहराने की मांग करेगी। शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख प्रकाश सिंह बादल ने कहा कि विश्वास मत पर मतदान में हिस्सा नहीं लेने वाले सांसद सुखदेव सिंह लिब्रा के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। तेलुगु देशम पार्टी और बीजद ने भी पार्टी व्हिप का उल्लंघन करने वाले सांसदों के खिलाफ कार्रवाई की है।
लोकतंत्र के इतिहास में यह पहली घटना है, जब लोकसभा अध्यक्ष को पार्टी से निकाला गया हो
भाजपा ने भी आठ सांसदों को दिखाया पार्टी से बाहर का रास्ता