गांधी नगर-मुंबई वंदे भारत एक्सप्रेस की बीते दो दिनों में दो बार मरम्मत करनी पड़ी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस ट्रेन का करीब एक हफ्ते पहले ही उद्घाटन किया था। केंद्र सरकार ने वंदे भारत की तारीफ करते हुए कहा है कि यह भविष्य की रेलगाड़ी है। हालांकि इस ट्रेन के बार-बार मवेशियों से टकराने और गड़बड़ी आने के कारण इस दावे पर सवालिया निशान लगने शुरू हो गए हैं।
गुजरात और महाराष्ट्र के बीच 6 और 7 अक्टूबर को वंदे भारत से मवेशी टकरा गए। वैसे तो रेलगाडि़यों से आए दिन मवेशी टकराते रहते हैं लेकिन इससे रेलगाडि़यों को कम ही नुकसान होता है।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के ट्विटर हैंडल से दुर्घटना का फोटो डाला गया और उसमें यह भी बताया गया कि इस रेलगाड़ी का उद्घाटन छह दिन पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था।
पश्चिम रेलवे ने वक्तव्य में कहा, ‘रेलगाड़ी को दुर्घटनास्थल पर 10 मिनट के लिए रोका गया था लेकिन यह रेलगाड़ी अपने समय पर गांधीनगर पहुंच गई। इस दुर्घटना में रेलगाड़ी के महत्त्वपूर्ण हिस्सों पर कोई असर नहीं पड़ा। टक्कर के कारण इंजन का आगे निकला हुआ हिस्सा ‘नोज कोन’ क्षतिग्रस्त हुआ। यह ‘नोज कोन’ खांचों पर टिका रहता है।
इस ‘नोज कोन’ को इस तरह डिजाइन किया गया है कि टक्कर होने पर इसे ही नुकसान पहुंचे और रेलगाड़ी के काम करने वाले हिस्सों पर प्रतिकूल असर नहीं पड़े। इसका डिजाइन ऐसा है कि टक्कर होने पर इसका ही नुकसान हो और इसे आसानी से बदला जा सकता है।’
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भी स्पष्टीकरण दिया कि जब तक इस रेल के लिए ऊंचाई पर ‘एलिवेटेड ट्रैक’ नहीं बनाए जाएंगे तब तक ऐसी टक्करें होती रहेंगीं। वैष्णव ने मवेशियों की टक्कर से हुए दो हादसों के बाद कहा, ‘इन रेलगाड़ियां की गति 120-130-160 किलोमीटर प्रति घंटे है। मवेशियों की इन रेलगाड़ियों से टक्कर रोकना नामुमकिन है। यह सामान्य सोच और डिजाइन का मामला है। इसका डिजाइन इस तरह का है कि ऐसी टक्करें होने पर इसे आसानी से दुरुस्त किया जा सके।’ इसके एक दिन बाद नई दिल्ली-वाराणसी वंदे भारत एक्सप्रेस के पहिये जाम होने के कारण दिक्कत आई। इसका परिचालन रोक दिया गया।
नुकसान से उठे सवाल
रेल मार्ग पर आए दिन मवेशियों की टक्कर होती रहती है। अब भारतीय रेल भविष्य के लिए अतिरिक्त ‘नोज कोन’ रखने पर विचार कर रहा है।
रेलवे अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि वंदे भारत के आधुनिकतम डिजाइन के कारण रेलगाड़ी के अगले निकले हिस्से ‘नोज कोन’ पर असर पड़ा है। वंदे भारत के मॉडल वीबी-1 का बेहतर संस्करण मॉडल वीबी-2 है जो पूर्ववर्ती म़ॉडल की अपेक्षा तेज गति से चलता है। हालिया मॉडल पूर्ववर्ती मॉडल वीबी-1 से 38 टन हल्का है। पूर्ववर्ती मॉडल वीबी-1 का वजन (430 टन) है। नए मॉडल की ‘नोज’ फाइबर रिएनफोर्स्ड प्लास्टिक (एफआरपी) से बनाई गई है।
रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘ रेलगाड़ी के आगे के हिस्से को मजबूत धातु से बनाने पर अधिक नुकसान पहुंच सकता है। आगे का हिस्सा मजबूत होने पर टक्कर का असर और जगह भी होता। अभी टक्कर लगने पर आगे लगा हिस्सा ‘नोज’ ही टूटता है। अन्य रेलगाड़ियों के विपरीत वंदे भारत में इंजन और डिब्बे अलग-अलग नहीं हैं।
लिहाजा ऐसे में इंजन के आगे का हिस्सा ‘नोज’ टक्कर लगने पर बम्पर की तरह काम करता है। इस ‘नोज’ को बदल दिया जाता है और इससे रेलगाड़ी के महत्त्वपूर्ण हिस्से सुरक्षित रहते हैं। ‘
मवेशियों की दूसरे दिन टक्कर होने पर रेलवे मंत्रालय ने वंदे भारत की अतिरिक्त ‘नोज कोन’ के दो सेट के लिए निविदाएं जारी कीं। रेलवे को अंदेशा है कि जब तक रेलवे ट्रैक के दोनों तरफ बाड़ नहीं लगाई जाएगी तब तक ऐसी दुर्घटनाएं होती रहेंगी।
बाड़ लगाना और भूमिगत पुल बनाना होगा जरूरी
वंदे भारत के मार्ग पर दुर्घटनाओं को रोकने के लिए भारतीय रेलवे अतिरिक्त ‘कोन’ के अलावा रेलवे ट्रैक पर बाड़ लगाने का भी विचार कर रही है।
रेलवे बोर्ड के पूर्व अतिरिक्त सदस्य विजय दत्त ने कहा, ‘दुनिया भर में मवेशियों से होने वाली टक्करों को रोकने के लिए रेलवे ट्रैक के दोनों तरफ बाड़ लगाई जाती है। अगर रेलगाड़ी की गति 120-130 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक होती है तो दुर्घटनाएं रोकने के लिए बाड़ अनिवार्य रूप से लगाई जाती हैं।
इससे भी ज्यादा जरूरी बात यह है कि रेलवे के आधुनिकीकरण के तहत हाई स्पीड रेल (बुलेट ट्रेन) के लिए रेलवे ट्रैक पर बाड़ लगाना और जरूरी हो जाता है। इसके अलावा एकमात्र विकल्प ऐलिवेटेड ट्रैक बनाना है जो वित्तीय रूप से व्यावहारिक नहीं है।
‘पूरे रेलमार्ग पर बाड़ लगाने के समक्ष मुख्य समस्या यह है कि यह चारागाहों, खेतों, अनियोजित और गैरकानूनी रिहायशी इलाकों से होकर गुजरती है। एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि बाड़ लगाना तभी सफल होगा, जब लोगों को वैकल्पिक सुरक्षित रास्ते जैसे रेलवे के ऊपरगामी पुल/ रेलवे के भूमिगत पुल (आरओबी/आरयूबी) आदि मुहैया कराना।
उन्होंने कहा,’हालांकि क्रॉसिंग के स्तर पर भी सुरक्षा चिंता का विषय बरकरार है। रेलवे ने क्रॉसिंग को खत्म करने के लिए रेलवे के ऊपरगामी पुल/ रेलवे के भूमिगत पुल के विकल्प की अनिवार्य रूप से पहचान की है। रेलवे इस दिशा में काम कर रहा है। अभी सबसे बड़ी जरूरत यह है कि बाड़ लगाने के काम को तेजी से किया जाए ताकि तेज गति से दौड़ने वाली रेलगाड़ियों को शामिल किया जा सके।’
रेलवे ने 2022-23 में 213 मानव वाली क्रॉसिंग को खत्म कर दिया है और इसकी जगह 250 रेलवे के ऊपरगामी पुल/ रेलवे के भूमिगत पुल बनाए हैं। रेलवे के मुताबिक ब्रॉड गेज नेटवर्क पर कोई मानवरहित क्रॉसिंग नहीं है। इस वित्तीय साल में 1,000 क्रॉसिंग को खत्म करने का लक्ष्य है।
विशेषज्ञों की राय है कि वंदे भारत-2 के लिए आसपास के क्षेत्र में आधारभूत संरचना का विकास करना होगा। इस रेलगाड़ी का वजन कम होने के कारण यह ज्यादा गति से दौड़ सकती है। रेलगाड़ी में बेवजह के सुधार करने से रेलगाड़ी के कार्य करने की क्षमता पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।