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डीडीए योजना ने लूटा यूपी-बिहार

Last Updated- December 07, 2022 | 7:43 PM IST

रियल एस्टेट के बॉक्स ऑफिस पर डीडीए की हाउसिंग योजना-2008 सुपरहिट साबित हो रही है। दिल्ली के साथ-साथ लखनऊ व पटना के बाजारों में भी इस योजना ने धूम मचा दी है।


हाउसिंग स्कीम के कारोबार ने पहले सप्ताह से ही जोर पकड़ लिया। इस योजना के सामने लखनऊ की मानसरोवर आवासीय योजना फ्लॉप साबित हो गयी है। लखनऊ के तमाम रियल एस्टेट के दर्शक इन दिनों प्रॉपर्टी डीलर के जरिए डीडीए स्कीम में बुकिंग करा रहे हैं, वहीं पटना के बाजारों में डीडीए के फॉर्म धड़ल्ले से बिक रहे हैं।

लखनऊ के बाशिंदों को डीडीए के मकानों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी वहां के प्रॉपर्टी डीलरों ने ले ली है। वे फॉर्म लाने से लेकर उसे जमा करने तक का ठेका ले रहे हैं। इसके लिए वे आवेदकों से 1100 रुपये वसूल रहे हैं। जबकि डीडीए फॉर्म की कीमत मात्र 100 रुपये हैं।

लखनऊ के प्रॉपर्टी डीलर अमिताभ भट्टाचार्य के मुताबिक, ‘अब तक 500 से अधिक फार्मों की बिक्री वह कर चुके हैं। और आगामी दस दिनों में अभी 200 फार्मों की बिक्री और हो जाएगी।’ लखनऊ में भट्टाचार्य जैसे 50 से अधिक प्रॉपर्टी डीलर इस काम में लगे हैं। उम्मीद की जा रही है कि अकेले लखनऊ शहर से कम से कम 25 हजार लोग डीडीए की इस योजना में पंजीयन के लिए आवेदन करेंगे।

पटना में तो नौकरी के फार्मों की तरह डीडीए के मकानों के फार्म की बिक्री हो रही है। ये फॉर्म फोटो स्टेट कर बेचे जा रहे हैं। पटना स्थित भारतीय स्टेट बैंक के नालंदा मेडिकल कॉलेज शाखा के अधिकारी ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘उनकी शाखा में रोजाना 10-12 लोग इस योजना में आवेदन के लिए ड्राफ्ट बनवा रहे हैं।

पटना शहर में एसबीआई की लगभग 40 शाखाएं हैं और कमोबेश सभी शाखाओं में यही आलम है। हालत ऐसी है कि एक ही परिवार के पांच-पांच लोग इस योजना के तहत आवेदन कर रहे हैं।’ एसबीआई ने तो इन आवेदकों को कर्ज देने के लिए बकायदा पटना के प्रमुख दैनिक अखबारों में विज्ञापन तक दे दिया है।

First Published - September 3, 2008 | 12:15 AM IST

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