न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गठित उच्च स्तरीय समिति ने सोमवार को पहली बैठक में सभी मुद्दों पर चर्चा के लिए चार उपसमूह गठित किए। समिति ने कई प्रासंगिक मुद्दों पर चर्चा भी की। उधर हजारों किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य की मांग को कानूनी जामा पहनाने की मांग को लेकर फिर दिल्ली में जुटे। न्यूनतम समर्थन मूल्य के पैनल ने चार उपसमूह गठित किए हैं। पहले उपसमूहों में हिमालयी राज्यों के लिए समूह के साथ साथ खेती के तरीके में बदलाव, खेती का विविधीकरण और कैसे अन्य राज्यों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य सुनिश्चित किया जा सके। दूसरे समूह सूक्ष्म सिंचाई के तरीकों पर था। इस समूह की अध्यक्षता आईआईएम अहमदाबाद के सुखपाल सिंह करेंगे। तीसरे समूह का नेतृत्व राष्ट्रीय कृषि विस्तार प्रबंधन संस्थान (मैनेज) के एक प्रतिनिधि करेगा। यह समूह जैविक और प्राकृतिक खेती के तरीकों सहित ‘शून्य बजट आधारित खेती’ का अध्ययन भी करेगा। चौथा समूह का नेतृत्व भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) करेगा। यह समूह देश भर में फसल विविधीकरण और फसल पैटर्न का अध्ययन करेगा।
हालांकि दिल्ली की सड़कों पर मूल संयुक्त किसान मोर्चा अलग रहा जिसने एक साल तक लंबे चले किसान आंदोलन का नेतृत्व किया था। किसानों के प्रदर्शन के दौरान खासे सक्रिय रहे योगेंद्र यादव ने ट्ववीट करके कहा कि दिल्ली में जुटे किसानों से किसान महापंचायत का कोई सरोकार नहीं है।
प्रदर्शन ने गैरराजनीतिक और संयुक्त किसान मोर्चा होने का दावा किया। इससे किसानों के समूह में दरार फिर उजागर हुई है। इस किसान समूह में एक समय देशभर के 300 से अधिक किसानों के समूह शामिल थे। किसानों के फिर जुटने से राष्ट्रीय राजधानी के लोगों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। लोगों को गंतव्यों तक पहुंचने में खासी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। लोगों को प्रदर्शन के दौरान आने-जाने में झेली गई दिक्कतें फिर से याद ताजा हो गई। दिल्ली की सीमाओं विशेषकर गाजीपुर और सिंघू बॉर्डर पर यातायात जाम के नजारे दिखाई दिए। पुलिस ने जगह-जगह अवरोधक लगा रखे थे जिससे दिल्ली की सीमाओं पर कुछ लोग एक घंटे से अधिक समय तक फंसे रहे।
‘महापंचायत’ के आयोजक व संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य (गैर राजनीतिक) अभिमन्यु सिंह कोहर ने कहा, ‘महापंचायत ने एक दिन का शांतिपूर्वक कार्यक्रम आयोजित किया है। हमने अपनी लंबित मांगों को फिर से उठाया है। इन मांगों में न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी शामिल थी। इसके तहत विद्युत संशोधन विधेयक 2022 को निरस्त करने सहित अन्य मांगें शामिल थीं। कोहर ने कहा, ‘लिहाजा हम अपनी मांगों को उठाने और उन पर चर्चा करेंगे। भविष्य के आंदोलन के लिए रूपरेखा तय करेंगे।’ इस बीच पूर्व कृषि सचिव संजय अग्रवाल की अध्यक्षता वाली समिति ने ‘शून्य बजट आधारित खेती को बढ़ावा देने’ और न्यूनतम समर्थन मूल्य को अधिक ‘प्रभावी और पारदर्शी बनाने’ के तरीकों पर भी चर्चा की। पैनल के एक सदस्य ने कहा ‘पैनल की अगली बैठक हैदराबाद में होने की उम्मीद है और अभी इस बैठक की तिथि तय नहीं की गई है।’ इस समिति में चेयरमैन सहित 26 सदस्य हैं और संयुक्त किसान मोर्चा के प्रतिनिधियों के लिए तीन सदस्यों के स्थान खाली हैं।
समिति के सदस्य बिनोद आनंद ने एक समाचार एजेंसी को बताया, ‘तीन विषयों पर प्रस्तुति दी गई। समिति इन तीन विषयों की जांच करेगी और सिफारिश देगी। इस दौरान यह चर्चा भी हुई थी कि क्या और कैसे किए जाने की जरूरत है। किन राज्य सरकारों ने अच्छा प्रदर्शन किया है और उनके सफल मॉडलों पर चर्चा की गई व उनसे सीख ली गई।’ किसानों के समूह सीएनआरआई के महासचिव के पद का कार्यभार आनंद संभाल रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस एक दिवसीय बैठक के दौरान संयुक्त किसान मोर्चा के प्रतिनिधि शामिल नहीं थे। नीति आयोग के सदस्य रमेश चंद भी अन्य व्यस्तताओं के कारण उपस्थित नहीं थे। संयुक्त किसान मोर्चा ने तीन कृषि कानूनों को लेकर प्रदर्शन का नेतृत्व किया था और मोर्चा ने सरकार को प्रस्तावित तीन कृषि वापस लेने के लिए मजबूर कर दिया था। इस समिति का गठन 18 जुलाई को हुआ था। संयुक्त किसान मोर्चा इस समिति को अस्वीकार कर चुका है। मोर्चा फैसला कर चुका है कि वे अपने प्रतिनिधियों को इस समिति में मनोनीत नहीं करेगा। इन तीन कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा की गई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते साल नवंबर में किसानों के एमएसपी मुद्दे पर समिति गठित करने का वादा किया था।