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ई-बसों की मांग ज्यादा, निर्माताओं को पुनर्भुगतान की सता रही चिंता

Last Updated- December 11, 2022 | 3:32 PM IST

सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था अपनाने की तात्कालिक जरूरत पर जोर देते हुए केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग सचिव गिरिधर अरमाने ने कहा कि राज्यों की ओर से इलेक्ट्रिक बसों की भारी मांग है, लेकिन विनिर्माता राज्य सड़क परिवहन निगमों (एसटीयू) की भुगतान की क्षमता को लेकर चिंतित हैं और जिसकी वजह से उन्हें वित्त संबंधी चिंता हो सकती है। राज्य परिवहन निगमों को सरकारों से सब्सिडी मिलती है।

बिजली मंत्रालय के उद्यम एनर्जी एफिशिएंसी सर्विसेज (ईईएसएल) की मालिकाना वाली सहायक इकाई कन्वर्जेंस एनर्जी सर्विसेज (सीईएसएल) द्वारा आयोजित सम्मेलन इनसाइट 2022 में अरमाने ने कहा, ‘सवाल यह है कि अगर उन्हें प्रस्तावित मॉडल के मुताबिक सेवाएं दी जाती हैं तो क्या वे पुनर्भुगतान में सक्षम होंगे? अगर टिकट से आमदनी हो रही है तो क्या वह कर्मचारियों के वेतन में नहीं खर्च होगी या वह राज्य सरकार की सामान्य निधि नहीं होगी? क्या उसका इस्तेमाल विनिर्माताओं के पुनर्भुगतान में होगा?’

उन्होंने कहा कि इस तरह की चिंताएं सीईएसएल द्वारा मंत्रालय के सामने लाई गई हैं, जब उसे अतिरिक्त बसों की खरीद के लिए कहा गया। विनिर्माताओं को चिंता है कि अगर एसटीयू की ओर से कोई चूक की जाती है तो उन्हें वित्तीय संकट हो जाएगा, क्योंकि उनके ऊपर भी बैंकों का कर्ज चुकाने का बोझ है।
ग्रैंड चैलेंज स्कीम के तहत पांच राज्यों में 5,000 से ज्यादा बसें उतारे जाने के लिए तैयार हैं, वहीं राज्यों की ओर से 15,000 अतिरिक्त बसों की मांग आ गई है और निकट भविष्य में 50,000 बसों की क्षमता है।

First Published - September 15, 2022 | 9:48 PM IST

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