केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि विशेष आर्थिक क्षेत्र (सेज), पेट्रोकेमिकल हब व औद्योगिक पार्क के लिए श्रम कानून में कोई रियायत नहीं दी जाएगी।
सरकार का यह फैसला इन औद्योगिक क्षेत्रों के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। देश के तीन प्रांतों ने इन कर मुक्त औद्योगिक इलाकों के लिए श्रम कानून में छूट देने का प्रस्ताव केंद्र के समक्ष रखा था।
बुधवार को कैबिनेट सचिव केएम चंद्रशेखर की अध्यक्षता में इस मसले को लेकर सचिवों की कमेटी की बैठक हुई थी। इस बैठक में श्रम कानून में छूट देने के लिए आंध्र प्रदेश सरकार के प्रस्ताव को ठुकरा दिया गया। आंध्र प्रदेश की सरकार ने काकीनाडा इलाके के पेट्रोकेमिकल्स व पेट्रोलियम निवेश क्षेत्र (पीसीपीआईआर) के लिए श्रम कानून में रियायत की सिफारिश की थी।
इसके अलावा महाराष्ट्र व गुजरात सरकार ने भी अपने यहां बन रहे सेज व औद्योगिक पार्क के लिए इस प्रकार की सिफारिश की थी जिसे कमेटी ने खारिज कर दिया। यह भी साफ किया गया कि जिन राज्यों ने पूर्व में इस प्रकार के औद्योगिक क्षेत्रों के लिए श्रम कानून में छूट दी है उसे मान्य नहीं समझा जाएगा।
श्रम मंत्रालय के एक अधिकारी ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘कुछ राज्यों ने यूपीए सरकार के गठन के पहले अपने राज्यों में इस प्रकार के विशेष क्षेत्रों के लिए श्रम कानून में छूट दे रखी थी। लेकिन इस सरकार ने यह साफ कर दिया है कि इस मामले में जो कानून प्रचलन में है वही राज्यों में लागू होगा। कर्मचारियों को रखने व उन्हें हटाने व अन्य मामलों में उन्हें किसी प्रकार की रियायत नहीं दी जाएगी।’
इसका मतलब यह हुआ कि कुछ राज्यों में इस प्रकार के कर मुक्त क्षेत्रों के लिए श्रम कानून में छूट जारी रहेगी जबकि अन्य को यह छूट नहीं होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के दोहरे मापदंड से कई कंपनियां विभिन्न राज्यों में अपने निवेश की नीतियों में बदलाव ला सकती है।