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हड़ताल और बंद से पड़ी दोहरी मार

Last Updated- December 07, 2022 | 9:03 AM IST

ट्रांसपोर्टरों की देशव्यापी हड़ताल का असर गहरा होता जा रहा है। गुरुवार को भी ऑल इंडिया मोटर कांग्रेस की हड़ताल जारी रही।


देर शाम तक ट्रांसपोर्टरों और सरकार के बीच मांगों को लेकर बातचीत जारी रही। सूत्रों के मुताबिक, सरकार टोल टैक्स और डीजल पर लगने वाले शुल्क में कमी पर विचार के लिए एक कमिटी गठित करने का मन बना रही है। इसमें  मोटर कांग्रेस के सदस्यों को भी शामिल किया जा सकता है। उधर, ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि मांगों को नहीं माने जाने तक हड़ताल जारी रहेगी।

दूसरी ओर भाजपा के भारत बंद के दौरान देश के विभिन्न राज्यों में कई प्रमुख बाजार बंद रहे। दिल्ली के सदर बाजार, चांदनी चौक, कश्मीरी गेट समेत तमाम प्रमुख बाजार बंद रहे। मोटर कांग्रेस के अध्यक्ष हरचरन सिंह लोहारा, यह पूछे जाने पर कि सरकार उन पर लगने वाले सेवा कर में राहत देने का मन बना रही है, ने कहा, सर्विस टैक्स या सेवा कर उन पर तो लागू ही नहीं होता। यह तो वह कर है जो वे व्यापारी से चार्ज कर सरकार को देते हैं।

उन्होंने कहा कि ट्रांसपोर्टरों की मुख्य मांग टोल टैक्स व डीजल पर लगने वाले केंद्रीय व प्रांतीय करों में कमी करना है। दिल्ली की मंडी व देश की अन्य मंडियों में रात के समय ट्रकों की आवाजाही लगभग सामान्य रही। हालांकि मोटर कांग्रेस का दावा है कि मंडियों में सामान्य दिनों के मुकाबले मात्र 5 फीसदी ट्रकों का आना हुआ। मोटर कांग्रेस के मुताबिक इस हड़ताल की वजह से रोजाना 2000 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है।

अमरनाथ श्राइन बोर्ड को जमीन हस्तांतरित करने के मुद्दे पर भारत बंद को समर्थन देने वाले कनफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के मुताबिक गुरुवार को 12,000 करोड़ रुपये का कोराबार प्रभावित रहा। कनफेडरेशन का दावा है कि बंद के आयोजन में देश भर के 5 करोड़ लोगों ने भाग लिया।

First Published - July 3, 2008 | 11:14 PM IST

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