त्योहारी सीजन की शुरुआत होते ही देश में खाद्य तेलों की मांग बढ़नी शुरू हो गई है। पिछले महीने खाद्य तेलों की मांग में 30 फीसदी से अधिक बढ़ोतरी दर्ज की गई। त्योहारी सीजन में खाद्य तेलों की कीमतों में अंकुश लगाने के सरकारी प्रयास और अंतर्राष्ट्रीय बाजार में दाम गिरने के बावजूद मुनाफावसूली के चलते खुले बाजार में कीमतें कम नहीं हो रही है। व्यापारिक संगठनों ने मुनाफावसूली पर रोक लगाने की अपील की है।
अखिल भारतीय खाद्य तेल व्यापारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के महानगर मुंबई प्रांत के अध्यक्ष शंकर ठक्कर बताया कि आयात के आंकड़ों से पता चलता है कि जुलाई 2022 में भारत ने 12.05 लाख टन खाद्य तेल का आयात किया, जबकि जून 2022 में यह 9.41 लाख टन था। इस तरह एक महीने में खाद्य तेलों की मांग 30 फीसदी से अधिक बढ़ी है। देश में खाद्य तेल का आयात जुलाई 2021 में 9.17 लाख टन था। आयात बढ़ने की वजह रक्षा बंधन से लेकर दिवाली तक रहने वाला त्योहारी सीजन है जिसके चलते खाद्य तेल की मांग बढ़ जाती है।
आयात बढ़ाने में अंतरराष्ट्रीय बाजार में पिछले कुछ महीनों में दामों में आई बड़ी गिरावट भी एक कारण है। पाम तेल करीब 600 डॉलर प्रति टन, सोयाबीन तेल 350 डॉलर प्रति टन और सूरजमुखी तेल करीब 460 डॉलर प्रति टन गिर गए है। जिसके कारण पिछले ढाई महीने में स्थानीय कीमतों में भी गिरावट आई है। आरबीडी पामोलिन का थोक मूल्य 26,000 प्रति टन, रिफाइंड सोयाबीन तेल 25,000 प्रति टन और सूरजमुखी तेल लगभग 22,000 प्रति टन कम हुआ है।
हालांकि, मार्च के बाद से रुपये में गिरावट और पाम तेल शिपमेंट के लिए उच्च माल ढुलाई एवं आयातकों की पुराने दाम की खरीदी के नाते एवं लगातार दाम कम होते देख आयातकों ने नुकसान से बचने के लिए दाम गिराने में दिलचस्पी नहीं ली है।
पाम तेल की अंतर्राष्ट्री य बाजारों से नई खरीदी के दाम गिरकर कांडला पोर्ट पर एक लाख रुपये प्रति टन पड़ रहा है जबकि आयातक 1,20,000 रुपये प्रति टन से भी ज्यादा भाव में बेच रहे हैं जिससे उपभोक्ताओं को ऊंचे दामों में तेल खरीदना पड़ रहा है। आयातकों द्वारा अधिक कीमत वसूले जाने पर कैट के महामंत्री तरुण जैन ने कहा आयातक अंतरराष्ट्रीय बाजारों में जब दाम बढ़ते हैं उसी समय पर दाम बढ़ा देते हैं और जब दाम कम हुए हैं तो मुनाफा वसूली कर रहे हैं इसके लिए इन पर नकेल कसने की आवश्यकता है। ताकि त्योहारी सीजन में उपभोक्ताओं को कम कीमत पर खाद्य तेल उपलब्ध हो सके।
गौरतलब है कि खाद्य तेल की कीमतें कम करने के लिए सरकार ने आयात शुल्क में कटौती के साथ खाद्य तेल कंपनियों से दाम कम करने की कई बार अपील कर चुकी है जिसके कारण कंपनियों ने कीमतों में कुछ कटौती भी की है। भारत का आरबीडी पामोलिन का आयात जुलाई के दौरान बढ़कर 43,555 टन हो गया, जो एक साल पहले 13,895 टन था और कच्चे पाम तेल (सीपीओ) का आयात जुलाई में बढ़कर 4.80 लाख टन हो गया (जुलाई 2021 में यह 4.51 लाख टन था )। आरबीडी पामोलिन का आयात बढ़कर 11.44 लाख टन हो गया । वर्ष 2021-22 के पहले नौ महीने (नवंबर से अक्टूबर) एक साल पहले इसी अवधि में 43,271 टन से बढ़कर।
अखिल भारतीय खाद्य तेल व्यापारी महासंघ के अध्यक्ष शंकर ठक्कर ने कहा कि तेल वर्ष 2021-22 के पहले नौ महीनों के दौरान आरबीडी पामोलिन का आयात मुख्य रूप से सीपीओ पर इंडोनेशिया के उच्च निर्यात शुल्क और आरबीडी पामोलिन पर कम शुल्क के कारण हुआ है। इसने इंडोनेशियाई निर्यातकों को अपने निर्यात को आगे बढ़ाने के लिए आरबीडी पामोलिन पर छूट देने का समर्थन किया। खाद्य तेलों के कुल आयात में आरबीडी पामोलिन की हिस्सेदारी 12 फीसदी है, जो पिछले साल महज आधा फीसदी थी। इससे सीपीओ के आयात पर असर पड़ा है। दरअसल बढ़ते स्टॉक के कारण इंडोनेशियाई पाम तेल इस समय दबाव में है। इंडोनेशिया ने सीपीओ पर निर्यात कर लगाने की सीमा को घटा कर 680 डॉलर प्रति टन कर दिया, जो पहले 750 डॉलर प्रति टन था।