चुनावी फसल काटने की मंशा से सरकार ने सीमांत और छोटे किसानों के कर्जमाफी की घोषणा तो कर दी, लेकिन कम से कम पश्चिमी उत्तर प्रदेश में तो यूपीए को ज्यादा फायदा मिलने के आसार नहीं हैं।
बिजनेस स्टैंडर्ड ने इस क्षेत्र का दौरा किया और पाया कि इलाके के ज्यादातर किसानों को कर्जमाफी योजना से लाभ नहीं मिलने वाला है। इसकी वजह यह है कि क्षेत्र के किसान कर्ज के बैंकों पर कम ही निर्भर रहते हैं और महाजनों व अन्य स्रोतों से कर्ज लेते हैं।
इलाके के एक किसान ज्ञान सिंह ने बताया कि बैंकों से कर्ज मिलने में बहुत समस्या होती है और तमाम कागजी खानापूर्ति के बाद कर्ज मिलने में महीनों लग जाते हैं। इलाके के 42,000 किसानों में से केवल 16 फीसदी ही पंजाब नेशनल बैंक के 70 शाखाओं से कर्ज लिया है। कुल कर्ज की बात करें, तो यह 268 करोड़ रुपये है, जबकि कर्जमाफी योजना के जरिए केवल 28 करोड़ रुपये ही माफ होंगे।
इससे यह भी स्पष्ट है कि इस इलाके के किसान अन्य क्षेत्रों के किसानों से कहीं ज्यादा संपन्न हैं। दरअसल, यहां के किसान मुख्य रूप से नकदी फसल, यानी गन्ना की खेती करते हैं। इलाके के गांवों में लगभग सभी घर पक्का बने हैं, जबकि कई घरों में दोपहिया-चार पहिया वाहन तक खड़े रहते हैं। कई किसानों के बच्चे नोएडा, गाजियाबाद के पब्लिक स्कूलों में पढ़ते हैं।
पीएनबी के एक अधिकारी ने बताया कि मेरठ इलाके के कई किसानों ने अपनी जमीनें डेवलपर्स को ऊंची कीमत पर बेच दी है, जिससे उन्हें अच्छी-खासी रकम मिली है। इसकी वजह से बैंक में जमा का प्रवाह तो बढ़ा है, लेकिन कर्ज लेने वालों की संख्या घटी है।