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‘उद्योग मित्र योजना’ के शत्रु

Last Updated- December 07, 2022 | 6:15 PM IST

वर्ष 2004 में मध्य प्रदेश में लघु आकार के उद्योगों (एसएसआई) के लिए ‘उद्योग मित्र योजना’ नामक एक स्कीम शुरू की गई थी।

राज्य में खासकर रुग्ण और बीमार पड़ी इकाइयों के लिए शुरू की गई यह योजना अपेक्षित परिणाम देने में विफल रही।

हालांकि 29 जून, 2007 को राज्य के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस योजना के एक साल और विस्तार की घोषणा की थी, लेकिन राज्य के उद्योग विभाग के अधिकारियों ने मंत्रिमंडल के निर्णय में संशोधन कर इसे अप्रासंगिक बना दिया।

इस उद्योग के एक अधिकारी के मुताबिक 7 जुलाई, 2007 को इस संबंध में संशोधन के साथ एक अधिसूचना जारी की गई थी, लेकिन विभाग के अधिकारियों ने ऑरिजनल स्कीम में एप्लीकेशन और निपटारे की 15 दिन की समय-सीमा को बढ़ा कर 6 महीने कर दिया।

राज्य में 2004 से पहले तकरीबन 11,000 लघु उद्योग या तो रुग्ण थे या फिर बंद पड़े थे। यह स्कीम बीमार पड़ी और बंद पड़ी इकाइयों के लिए शुरू की गई थी।

इस स्कीम में इन लघु उद्योगों के लिए एक सरलीकृत प्रक्रिया की पेशकश की गई थी ताकि वे प्लॉट आबंटन को लेकर सरकार के खिलाफ अपनी याचिका वापस ले सकें और औद्योगिक गतिविधियां तुरंत शुरू कर सकें।

उन्हें अपने प्लॉटों को उन लोगों को बेचने की भी अनुमति दी गई थी जो अपनी इकाइयां तुरंत शुरू करने को राजी हों। 2004 की स्कीम में नियमों और शर्तों से जुड़ी विसंगतियों को दूर करने के लिए एक अनिवार्य  प्रावधान शामिल किया गया था। 

एसएसआई के आवेदन की तारीख से 15 दिन के अंदर यह काम किया जाना था लेकिन अधिकारियों ने इस प्रावधान में बदलाव कर 15 दिन के बजाय इसे 6 महीने में तब्दील कर दिया था।

अधिकारी ने बताया, ‘स्कीम के लॉन्च होने के बाद पहले चरण में 2350 से भी अधिक इकाइयों ने इस योजना में दिलचस्पी दिखाई थी।’

लेकिन एक साल बाद 2005 में इस स्कीम को बंद कर  दिया गया था।? बाद में जून, 2007 में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा इसे पुनर्जीवित किया गया, लेकिन यह अपेक्षित परिणाम देने में पुन: विफल रही। उद्योग विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस मुद्दे पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

First Published - August 24, 2008 | 8:22 PM IST

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