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पर्यावरण प्रावधान होंगे शिथिल

Last Updated- December 11, 2022 | 5:51 PM IST

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने तीन प्रमुख कानूनों-पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986, वायु (संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण) अधिनियम, 1986 और जल (संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण) अधिनियम, 1974 के दंड प्रावधानों को शिथिल करने का प्रस्ताव किया है।
मंत्रालय ने एक अधिसूचना में कहा है कि इन कानूनों के मौजूदा प्रावधानों को अपराधमुक्त करने के लिए सुझाव मिले थे, जिससे कि इसके साधारण उल्लंघन पर जेल की सजा का डर  दूर किया जा सके। इसलिए संशोधन किए गए हैं।
पर्यावरण संरक्षण अधिनियम (ईपीए) के प्रावधानों का अनुपालन न करने या उसमें विफल रहने पर अधिकृत न्याय अधिकारी द्वारा जुर्माना लगाने का प्रावधान किया जाएगा। अधिसूचना में कहा गया है, ‘हालांकि अगर कोई गंभीर उल्लंघन होता है, जहां किसी को गंभीर चोट आती है या जान गंवानी पड़ती है, ऐसी स्थिति में इस मामले में भारतीय दंड संहिता, 1860 के प्रावधान लागू होंगे।’इसी तरह की अधिसूचना जल एवं वायु प्रदूषण अधिनियम के मामले में भी जारी की गई है। जल प्रदूषण अधिनियम के तहत केंद्र सरकार ने साथ में कहा है कि विभिन्न राज्यों में विभिन्न प्रक्रिया है, जिसकी वजह से उद्योगों के बीच में भ्रम पैदा हो गया है और इसमें एकरूपता लाए जाने की जरूरत है।
इसके पहले ईपीए के तहत अनुपालन न होने की स्थिति में उल्लंघन करने वालों को पांच साल तक जेल की सजा या 1,00,000 रुपये जुर्माना या दोनों का प्रावधान था। अगर यह आगे जारी रहता है तो ऐसी स्थिति में आगे  चूक की अवधि तक रोजाना 5,000 रुपये जुर्माने का प्रावधान है। अगर यह चूक एक साल या इससे भी ज्यादा जारी रहती है तो उल्लंघन करने वाले को सात साल तक जेल की सजा हो सकती है।
केंद्र सरकार ने अब जुर्माने की राशि 5 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये तक कर दी है, लेकिन पहली चूक पर जेल की सजा का प्रावधान खत्म कर दिया है। दोबारा अपराध की स्थिति में जुर्माने की राशि इससे हुए नुकसान के बराबर होगी। अब केवल तभी जेल की सजा होगी, जब चूक करने वाला जुर्माने और अतिरिक्त जुर्माने के भुगतान में नाकाम रहता है।
एमओईएफसीसी ने इस अधिनियम में प्रावधान किया है कि कोई भी असंतुष्ट पक्ष संबंधित न्यायिक अधिकारी के द्वारा पारित आदेश के खिलाफ राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में अपील कर सकता है। इसी तरह के संशोधन वायु एवं जल प्रदूषण के मामले में भी किया गया है।
मंत्रालय ने कहा है कि पर्यावरण संरक्षण कोष नाम से एक कोष का गठन किया गया है, जिसमें तीन संशोधित अधिनियमों से मिलने वाली जुर्माने की राशि जमा की जाएगी। इसका इस्तेमाल प्रभावित पक्ष को हुए नुकसान की भरपाई में होगा। बहरहाल संशोधन में कहा गया है कि केंद्र सरकार फंड के इस्तेमाल व उसके इस्तेमाल के तरीके के बारे में नियम लाएगी। दंड के प्रावधान एकसमान करने को लेकर केंद्र सरकार ने संशोधित अधिनियम के बारे में कहा है, ‘अपराध प्रक्रिया संहिता 1973 के प्रावधान लागू होंगे, अगर तलाशी और जब्ती उल्लिखित अधिनियम की धारा 94 के तहत होती है।’मंत्रालय ने इन संशोधनों पर 21 जुलाई तक जनता से राय मांगी है।

First Published - July 3, 2022 | 11:51 PM IST

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