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एटमी करार पर बात से पहले ही आर-पार

Last Updated- December 07, 2022 | 10:00 AM IST

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने जी-8 में हिस्सा लेने जापान जाने से पहले परमाणु करार पर आगे बढ़ने के संकेत दिए हैं।


हालांकि यूपीए सरकार इस मामले में इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (आईएईए) से औपचारिक बातचीत शुरू करने से पहले संसद में विश्वास मत लाने की योजना बना रही है।

दरअसल, यूपीए के प्रमुख नेताओं का मानना है कि करार पर कदम आगे बढ़ाने से गठबंधन में शामिल वामदल उसका साथ छोड़ सकते हैं, ऐसे में सरकार अल्पमत में आ जाएगी। ऐसे में पहले ही विश्वास मत हासिल कर लेना उचित होगा। उधर, वामपंथी पार्टियां भी 10 जुलाई को सरकार से समर्थन वापस लेने की रणनीति तैयार कर रही हैं।

इस बारे में चारों वामपंथी पार्टियां मंगलवार को एक बैठक का आयोजन करेगी, जिसमें इस बात का निर्णय लिया जाएगा। सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री ने बताया कि सरकार 21 जुलाई के आस-पास संसद का विशेष सत्र आयोजित कर सकती है, जिसमें विश्वास मत हासिल किया जाएगा। साथ ही लंबित पड़े कुछ विधेयक को भी पारित कराने पर जोर होगा।

उधर, सूत्रों का कहना है कि एनपीटी पर हस्ताक्षर किए बिना परमाणु करार पर आगे बढ़ने से चीन, पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश आईएईए में भारत के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकते हैं। इसके साथ ही सरकार को इस बात की भी चिंता है कि अगर सदन में वह विश्वास मत हासिल नहीं कर सकी, तो विपक्षी पार्टियों का और भी विरोध झेलना पड़ सकता है, जो सरकार के लिए खासी परेशानी खड़ी कर सकता है।

अगर सरकार सदन की विशेष सत्र बुलाती है, तो इस बात पर भी सवाल उठेंगे कि मानसून सत्र बुलाया जाएगा या नहीं। हालांकि इस पर मंत्री ने बताया कि इस बात की भी संभावना है कि विशेष सत्र के बाद मानसून और शीतकालीन सत्र एक साथ बुलाया जा सकता है। आमतौर पर होता यही है कि जब भी सरकार संसद सत्र बुलाती है, तो पहले राष्ट्रपति को इसकी सूचना देनी होती है।

उसके बाद राष्ट्रपति इस बारे में तीन सप्ताह की नोटिस जारी करते हैं। हालांकि यूपीए और एनडीए सरकार में कई बार तीन सप्ताह की तय अवधि से पहले भी सत्र बुलाई जा चुकी है। अगर विशेष सत्र में सरकार विश्वास मत हासिल कर लेती है, तो इस बात की चिंता नहीं रहेगी कि कोई उसे फिर से बहुमत सिद्ध करने को कह सकता है।

First Published - July 8, 2008 | 5:02 AM IST

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