सार्वजनिक उद्यम सर्वेक्षण के अनुसार केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (सीपीएसई) में महिला कर्मचारियों की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 21 में गिरकर 9.35 फीसदी रह गई जो इससे पिछले साल 10 फीसदी थी। यह सरकारी स्वामित्व वाली कंपनियों में लिंग अंतर बढ़ने को इंगित कर रहा है।
यह अखिल भारतीय महिला श्रम बल भागीदारी (एलएफपीआर) से काफी कम है जो जुलाई 2020 से जून 2021 की अवधि के लिए आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) की सालाना रिपोर्ट के अनुसार 25.1 फीसदी था।
रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 21 में जब महामारी ने अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया था सीपीएसई में महिला कर्मचारियों की संख्या 9.5 फीसदी घटकर 80,525 रह गई।
पिछले महीने श्रम मंत्रालय के सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि श्रमशक्ति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने, लचीला कार्यस्थल, घर से काम करने की पारिस्थितिकी तंत्र और लचीली कार्यावधि शुरू करनी चाहिए। उन्होंने कहा था, ‘महिला श्रम का सही उपयोग कर के भारत अपने लक्ष्य को ज्यादा जल्दी हासिल कर सकता है।’ सीपीएसई में महिला कर्मचारियों का प्रतिशत पिछले चार वर्षों से 9-10 फीसदी पर स्थिर है।
हालांकि प्रबंधकीय पदों पर महिलाएं बढ़ी हैं। 255 संचालित सीपीएसई में 32 फीसदी महिला कर्मचारी या तो प्रबंधकीय पद पर हैं या अधिकारी हैं, 8 फीसदी पर्यवेक्षी पदों पर हैं जबकि 60 फीसदी मजदूर श्रेणी में हैं।
सभी स्तरों पर महिला कर्मियों की संख्या में गिरावट देखी गई है। पर्यवेक्षी स्तर पर सर्वाधिक (32.53 फीसदी) गिरावट है और सबसे कम अकुशल मजदूरों (1.54 फीसदी) के लिए था।