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केरल में मिला मंकीपॉक्स का पहला मामला

Last Updated- December 11, 2022 | 5:35 PM IST

देश में मंकीपॉक्स के पहले मामले की पु​ष्टि हुई है। यह मामला केरल के कोल्लम जिले में पाया गया है। गुरुवार को इस मामले की पु​ष्टि होने के बाद केंद्र ने राज्य के स्वास्थ्यअ​धिकारियों की सहायता के  लिए तत्काल वहां अपना उच्च स्तरीय दल भेज दिया है।
केंद्रीय दल में नैशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल, डॉ राम मनोहर लोहिया अस्पताल नई दिल्ली और केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के विशेषज्ञ एवं अ​धिकारी शामिल हैं।
केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने गुरुवार को बताया कि यह व्य​क्ति हाल ही में विदेश से लौटा था और जांच में वह संक्र​मित पाया गया। इस व्यक्ति में मंकीपॉक्स के लक्षण दिखने के बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। उसके नमूने जांच के लिए राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान में भेजे गए थे। व्यक्ति विदेश में मंकीपॉक्स के एक मरीज के साथ निकट संपर्क में था।
इससे पहले केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों को पत्र लिखकर इस बीमारी से बचाव के लिए पूरी सक्रियता से सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों पर काम करने के निर्देश दिए हैं।
केंद्र सरकार ने दुनिया भर में बढ़ते मामलों के बीच 31 मई को मंकीपॉक्स बीमारी के प्रबंधन के लिए पहले भी दिशानिर्देश जारी किए थे।
 स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों से कहा है कि वे किसी मामले का पता लगाने के बाद प्रवेश बिंदुओं की जांच शुरू करें, संपर्क का पता लगाएं और निगरानी गतिविधियां शुरू करें। जांच और इलाज के नियम तय किए जाने चाहिए और बीमारी की निगरानी टीमों के साथ अस्पतालों में काम करने वाले डॉक्टरों को सामान्य संकेतों और लक्षणों को लेकर सतर्क रहना चाहिए।
केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण के पत्र में कहा गया है कि मरीजों को तब तक अलग-थलग रखा जाना चाहिए जब तक कि सभी घाव पूरी तरह से ठीक नहीं हो जाते हैं। भूषण ने कहा कि अस्पतालों की पहचान की जानी चाहिए और संदिग्ध या पुष्ट किए गए मामलों के प्रबंधन के लिए उन अस्पतालों में पर्याप्त मानव संसाधन और लॉजिस्टिक सहायता सुनिश्चित की जानी चाहिए। गहन जोखिम संचार, स्वास्थ्य कर्मियों, त्वचा और बाल चिकित्सा ओपीडी, टीकाकरण क्लीनिक जैसी वेबसाइटों के साथ साझा किया जाना चाहिए। पत्र में कहा गया है कि लोगों को तुरंत लक्षणों की रिपोर्ट करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने 1 जनवरी से प्रयोगशाला से पुष्ट हुए मंकीपॉक्स के 3,413 मामलों की सूचना दी है जिसमें एक व्यक्ति की मौत की सूचना भी मिली है।
स्वास्थ्य मंत्रालय के पत्र में कहा गया है, ‘इनमें से अधिकांश मामले यूरोपीय क्षेत्र (86 प्रतिशत) और अमेरिका (11 प्रतिशत) से दर्ज किए गए हैं। यह वैश्विक स्तर पर मामलों के प्रसार में धीमी लेकिन निरंतर वृद्धि की ओर इशारा करता है।  पहली बार पांच डब्ल्यूएचओ क्षेत्रों में मामले और क्लस्टर की साथ-साथ रिपोर्टिंग की जा रही है। डब्ल्यूएचओ ने वैश्विक स्तर पर मामलों के प्रसार को ‘सामान्य’ बताया है।’
मंकीपॉक्स की शुरुआत आमतौर पर बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, पीठ दर्द और थकावट के साथ शुरू होती है। यूएस सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल ऐंड प्रिवेंशन (सीडीसी) का कहना है कि यह लिम्फ नोड में सूजन भी बढ़ाता है जो चेचक के बिल्कुल उलट लक्षण है। डब्ल्यूएचओ ने कहा है कि चिकनपॉक्स, खसरा, बैक्टीरियल त्वचा संक्रमण, खुजली, सिफलिस और दवा से जुड़ी एलर्जी को  मंकीपॉक्स से जोड़ने की जरूरत नहीं है।
यह लक्षण आमतौर पर दो से चार सप्ताह तक रहते हैं। यह आमतौर पर अपने तक सीमित रहने वाली बीमारी है। बुखार के प्रारंभिक चरण के बाद, त्वचा फटी सी नजर आती है और चेहरे, हथेलियों और पैरों के तलवों पर चकत्ते दिखते हैं। यह आंखों के कॉर्निया और जननांग क्षेत्रों को भी प्रभावित कर सकता है। ऐसा असर दो से चार सप्ताह तक रह सकते सकता है। इसके बाद इसमें थोड़ी कठोरता आती है और यह दर्द देने लगता है और इसमें मवाद भी भर जाता है। अंत में इस घाव की बाहरी परत सूखकर गिर जाती है।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने मरीजों को तब तक अलग करने को कहा है जब तक कि घाव की बाहरी परत सूख कर गिर न जाए। मंत्रालय ने इस बात पर भी गौर करने को कहा है कि दृष्टि में कोई धुंधलापन न आए और मूत्र में कोई कमी न हो।
(साथ में एजेंसियां)

First Published - July 14, 2022 | 11:37 PM IST

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