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Gandhi Jayanti 2022: कारोबार को लेकर क्या थे महात्मा गांधी के विचार

Last Updated- December 11, 2022 | 2:26 PM IST

आज यानी 2 October को गांधी जयंती होती है, इस बात से हम सभी परिचित है लेकिन महात्मा गांधी के जीवन के ऐसे बहुत से पहलू हैं जिनसे हम अब भी अपरिचित है। जिनमे से एक विषय है कारोबार और पूंजीवाद को लेकर महात्मा गांधी का विचार क्या था ?

महात्मा गांधी कारोबार और पूंजीवाद के खिलाफ नहीं थे। ऐसा पिछले साल लॉन्च  हुई सेवानिवृत्त उद्यमी जेरी राव की किताब में लिखा गया है। यह किताब ‘इकॉनामिस्ट गांधी: द रूट्स एंड्स रिलेवेंस ऑफ द पोलिटिकल इकोनॉमी ऑफ द महात्मा’ है। जेरी राव नाम से प्रसिद्ध इस किताब के लेखक, का असली नाम जैतीर्थ राव है। राव एक भारतीय व्यवसायी और उद्यमी हैं। यह Mphasis Limited के संस्थापक और पूर्व CEO हैं। वह वैल्यू एंड बजट हाउसिंग कॉरपोरेशन (VBHC) के भी संस्थापक हैं। 
जेरी राव की किताब में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के व्यक्तित्व के छिपे पहलुओं के बारे में बात कि गई है।  साथ ही यह भी बताया गया है कि वे अर्थशास्त्र व पूंजीवाद को लेकर क्या विचार रखते थे। यह किताब गांधीजी को एक मैनेजमेंट गुरु के रूप में दर्शाती है।  किताब में उन्हें बाजार पूंजीवाद को बढ़ावा देने वाला बताया है।

इसके अलावा किताब में शिक्षा, समाज, धर्म, नीति और मानव स्वभाव जैसे विषय में महात्मा गांधी के विचारों के बारें में भी बताया गया है। 

किताब में महात्मा गांधी का दृष्टिकोण कारोबार को लेकर सकारात्मक बताया गया है। इस बात से हम सब परिचित हैं की महात्मा गांधी गरीबी के खिलाफ थे और चाहते थे कि हर भारतीय आरामदायक जीवन जिए। इसके लिए उन्होंने विभिन्न प्रयास भी किए। किताब में इस पहलु पर भी चर्चा की गई है। किताब के अनुसार गांधीजी की व्यापार को लेकर उनकी सकारात्मक सोच का कारण उनकी जाति है। जो उनके द्वारा किए गए कई कार्यों में भी प्रदर्शित होता है।

किताब में गांधीजी के एक मुस्लिम कारोबारी के वकील के तौर पर दक्षिण अफ्रीका जाने की बात की गई है। वह कारोबारी मूल रूप से बनिया था। दक्षिण अफ्रीका में महात्मा गांधी के दो सहयोगी भी थे, जिनका नाम पोलक व कल्लेनबेच था । ये दोनों भी पेशे से यहूदी कारोबारी ही थे। वहीं भारत में वे मारवाड़ी बनिये और ख्यात कारोबारी रहे जमनालाल बजाज के करीबी थे। किताब में कहा गया है कि महात्मा गांधी राजनीति व व्यवसाय को लेकर स्पष्ट नजरिया रखते थे। लेखक का यह भी मानना है कि सभी डेटा-आधारित फर्म्स को गांधी को पढ़ना चाहिए। जिससे उन्हें अपने व्यवसाय को बेहतर करने में मदद मिल सकती है।

First Published - October 2, 2022 | 2:10 PM IST

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