छठे वेतन आयोग की सिफारिशों को कैबिनेट की हरी झंडी मिलने के बाद अब राज्यों पर भी नए वेतनमान लागू करने का दबाव बढ़ गया है।
आमतौर पर राज्य सरकारें केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों के आधार पर कर्मियों का वेतन तय करते हैं, लेकिन कुछ राज्यों में अलग से वेतन आयोग का भी गठन किया जाता है। ऐसे में केंद्र सरकार ने एक बेंचमार्क तय कर दिया है, जिससे राज्य कर्मचारी यूनियन सरकार पर वेतन में संशोधन का दबाव बनाने में जुट गए हैं।
रेटिंग एजेंसी क्रिसिल के अर्थशास्त्री डी.के. जोशी का कहना है कि अगर राज्य सरकारें छठे वेतन आयोग के आधार पर कर्मियों के वेतन में संशोधन करती है, तो वित्तीय स्थिति के आधार पर विभिन्न राज्यों में इसका प्रभाव अलग-अलग पड़ेगा। हालांकि एक दशक पहले पांचवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करते समय राज्यों की वित्तीय स्थिति पर व्यापक असर पड़ा था।
वैसे कई राज्यों ने बकाया राशि का नकद भुगतान न कर, उसे भविष्य निधि कोष में जमा कराया था, इससे राज्य की वित्तीय स्थिति पर तत्काल बोझ नहीं पड़ा था। विशेषज्ञों का कहना है कि जिन राज्यों की वित्तीय स्थिति सुदृढ़ है, वहां वेतन वृद्धि का असर ज्यादा नहीं पड़ेगा।
कर्नाटक की बात करें, तो वहां सरप्लस राजस्व है, ऐसे में वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने से राज्य के बजट पर खास असर नहीं पड़ेगा। पश्चिम बंगाल में कर्मियों को लगभग केंद्रीय वेतनमान की दर से भुगतान किया जाता है। राज्य के एक अधिकारी का कहना है कि राज्य सरकार केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने पर विचार कर रही है।
हालांकि पांचवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करते समय राज्य पर वित्तीय बोझ काफी बढ़ गया था। इसके बारे में अधिकारी का कहना था कि केंद्र से मदद नहीं मिलने की वजह से ऐसा हुआ। गुजरात में अगर छठे वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होती हैं, तो राज्य पर 1,700-1,800 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ बढ़ सकता है।
हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने पलवल में घोषणा की कि राज्य में केंद्र सरकार की तरह छठे वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि इस बारे में मुख्य सचिव धरमवीर सिंह की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया है, जो छठे वेतन आयोग की सिफारिशों का अध्ययन करेगी।
इससे पहले, राज्य सरकार ने वित्त वर्ष 2008-09 के लिए वेतन वृद्धि और पेंशन के मद में 1550 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान भी किया है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने कहा है कि राज्य सरकार छठे वेतन आयोग की सिफारिशों का अध्ययन कर रही है और केंद्र सरकार द्वारा इन सिफारिशों के क्रियान्वयन के बाद राज्य सरकार अपने कर्मचारियों को बेहतर वेतन देने के लिए आवश्यक कदम उठाएगी।
छत्तीसगढ़ में इस साल नवंबर में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में राज्य सरकार अपने 2,50,000 कर्मचारियों को केंद्र के मुकाबले कम वेतन देकर कोई जोखिम लेना नहीं चाहेगी। विशेषज्ञों के मुताबिक, पंजाब सरकार अपने कर्मचारियों को केंद्रीय वेतनमान के बराबर वेतन देती रही हैं।
ऐसे में छठे वेतन आयोग की सिफारिशों के बाद राज्य सरकार भी उसी तर्ज पर वेतन वृद्धि कर सकती है। वैसे, निकट भविष्य में कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं, वहीं अगले साल लोकसभा चुनाव भी है। ऐसे में राज्य सरकारें अपने कर्मचारियों को नाखुश नहीं कर सकती है। ऐसे में राज्य सरकारों पर भी वेतन में संशोधन का दबाव बढ़ गया है।