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पाती पर पता नहीं…, पर मिल जाएगी

Last Updated- December 07, 2022 | 7:41 AM IST

अगर आपके मोबाइल फोन में ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (जीपीएस) है, तो आपको किसी स्थान तक पहुंचने के लिए अब पूरे पते की जरूरत नहीं होगी।


बस, डाक विभाग से उस जगह का कोड नंबर लेना होगा और जीपीएस की मदद से आप अमुक स्थान पर पहुंच जाएंगे। डाक विभाग की यह योजना बहुत जल्द साकार होने वाली है। इसके लिए विभाग ‘पिन-प्लस’ योजना लॉन्च करने का इरादा बना रहा है, जिसमें एक पिन कोड होगा, जिसमें घर या ऑफिस के पते का जिक्र होगा।

इसके लागू होने के बाद बल्क में मेल भेजने वाले कॉरपोरेट उपभोक्ताओं और पोस्टमैन, दोनों को लाभ होगा। इसके अलावा डाक विभाग पत्रों की छंटाई के लिए डिजिटल मशीन लगाने की योजना बना रहा है, जिससे जल्द से जल्द पत्रों को गंतव्य तक पहुंचाया जा सके। वर्तमान में 6 अंकों वाला पिन कोड वास्तव में अमुक डाकघर का कोड होता है, जबकि पत्र पर लिखे पते से डाकिया घर तक पाती पहुंचाता है।

हालांकि विभिन्न भाषाओं में लिखे गए पते की वजह से कई बार पत्र सही पते पर नहीं पहुंच पाता है। डाक विभाग का मानना है कि नई कोड नीति के तहत आसानी से और जल्द गंतव्य तक पत्र पहुंचा पाना संभव होगा। फिलहाल दो अंकों वाले प्लस कोड जारी किया गया है, जिससे पोस्टमैन को यह पता चलता है कि उसे कौन सा पत्र डिलिवर करना है। हालांकि इसका इस्तेमाल बहुत कम लोग करते हैं और यह ज्यादा लोकप्रिय भी नहीं है।

लेकिन विभाग का मानना है कि प्लस कोड का अंतिम तीन अंक डिलिवरी स्थल की सटीक जानकारी देगा। विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि जब यह योजना लागू हो जाएगी, तो एंबुलेंस, फायर और पुलिस दस्ते को भी आसानी होगी और वह जल्द से जल्द सही पते पर पहुंच सकेंगे। हालांकि पिन प्लस के अंतिम तीन अंकों पर अभी रिसर्च चल रही है, जिसमें थोड़ा समय अभी लगेगा।

यह सेवा मुख्य रूप से कॉरपोरेट उपभोक्ताओं के लिए शुरू की जा रही है। ऐसे में विभाग इसकी मार्केटिंग और विज्ञापन पर 10 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना बना रहा है। इस योजना को अगले साल के मध्य तक दिल्ली-कोलकाता समेत देश के 26 बड़े शहरों में लागू किया जाने वाला है।

First Published - June 25, 2008 | 12:14 AM IST

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