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‘सरकार ने खाते ब्लॉक करने को कहा’

Last Updated- December 11, 2022 | 2:51 PM IST

 ट्वविटर ने सोमवार को कर्नाटक उच्च न्यायालय  को बताया कि साल 2021 में किसानों के प्रदर्शन के दौरान केंद्र सरकार ने ट्वीट हटाने के लिए ही नहीं कहा था बल्कि उन खातों को ब्लॉक करने के लिए भी कहा था। ट्विटर के मामले की पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दातार ने कहा, ‘यदि अखबार और मीडिया के संगठन किसानों के प्रदर्शन के बारे में खबर दे सकते हैं तो ऐसा ट्विटर क्यों नहीं कर सकता?’
दातार ने न्यायमूर्ति कृष्णा एस. दीक्षित को बताया कि फरवरी, 2021 से 2022 के दौरान दिल्ली व उसके आसपास के इलाकों में किसानों के धरने पर केंद्र सरकार ने अकाउंट (ट्विटर खाते) ब्लॉक करने के लिए 10 आदेश जारी किए थे। उन्होंने जोर देकर कहा कि अनुच्छेद 69 ए (इलेक्ट्रॉनिक संचार को बाधित करने की शक्ति) खातों को बड़े पैमाने पर ब्लॉक करने के बारे में नहीं कहती है।
ट्विटर ने यह भी तर्क दिया कि भारत के कानून ट्वीट को ब्लॉक करने की अनुमति देते हैं। हालांकि राजनीतिक आलोचना करने के आधार पर पूरे खाते को ब्लॉक करना वाक व अभिव्यिक्ति की स्वतंत्रता की मूल भावना और सरकार की आलोचना करने के अधिकार के खिलाफ है।
माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफार्म ने कहा कि सरकार ने जिन खातों को ब्लॉक करने के लिए कहा था, उनमें से 50 से 60 फीसदी हानिकारक या आपत्तिजनक नहीं थे। ट्विटर ने कहा, ‘केंद्र सरकार के कहने पर अकाउंट को बंद करने से हम एक मंच के रूप में प्रभावित हुए हैं। हमने इन अकाउंट को कथित उल्लंघन का नोटिस जारी किए बिना ही बंद किया।’
दातार ने श्रेया सिंघल बनाम भारत सरकार मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला दिया। इस मामले में आईटी अधिनियम के ब्लॉकिंग नियम को बरकरार रखा गया था। उन्होंने इस आदेश के संदर्भ में कहा कि खातों को बंद करने के आदेश जारी करने से पहले मध्यवर्ती संस्थाओं जैसे ट्विटर को नोटिस जारी करना अनिवार्य है और उनका पक्ष सुनना होगा। उन्होंने कहा, ‘जब आप खाते को ब्लॉक करने का आदेश जारी करते हैं तो इससे मध्यवर्ती संस्था और संबंधित व्यक्ति पर प्रभाव पड़ता है। यह आदेश प्लेटफॉर्म को सूचना जारी करने से रोकता है।’
किसानों के प्रदर्शन के दौरान केंद्र ने खातों को ब्लॉक करने के लिए 10 आदेश जारी किए थे और कई खातों को निलंबित करने का आदेश दिया था। इन आदेशों की प्रति सील बंद लिफाफे में उच्च न्यायालय के पेश की गई। इन आदेशों के बाद ट्विटर ने ब्लॉक करने के आदेश को चुनौती देते हुए कहा कि ये आदेश संविधान के तहत दिए गए यूजर के अधिकारों का अतिक्रमण करते हैं।
ट्विटर ने याचिका में कहा, ‘यह आदेश स्वाभाविक रूप से मनमाना है। यह आदेश प्रक्रियात्मक और मूल रूप से आईटी अधिनियम की धारा 69 ए के अनुरूप नहीं हैं।’ ट्विटर ने 1,474 अकाउंट और 175 ट्वीट में से 39 यूआरएल को ही ब्लॉक करने को चुनौती दी है।

First Published - September 26, 2022 | 10:59 PM IST

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