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सरकार को आया ‘करार’

Last Updated- December 07, 2022 | 9:01 AM IST

परमाणु करारपर लड़खड़ाती कांग्रेस-यूपीए सरकार को मुलायम सिंह के नेतृत्व वाली समाजवादी पार्टी (सपा) सहारा देने को तैयार है।


हालांकि इसके लिए सपा ने कुछ शर्तें रखी हैं। इसके तहत सपा सरकार को समर्थन देने को राजी है, लेकिन बदले में वह मंत्रिमंडल में शामिल करने की मांग रखी है। इसके साथ ही आगामी लोकसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश में सीटों के बंटवारे पर भी बात कर रही है।

उधर, वामपंथी पार्टिंया- माकपा, भाकपा, फॉरवर्ड ब्लॉक और आरएसपी ने सरकार को चेतावनी दी है कि अगर वह परमाणु करार पर आगे बढ़ती है, तो वह सरकार से समर्थन वापस ले लेगी। वामपंथी पार्टियों के पास कुल 61 सांसद हैं, ऐसे में समर्थन वापस लेने से सरकार अल्पमत में आ जाएगी और मध्यावधि चुनाव की स्थिति आ सकती है। सपा के पास 39 सांसद हैं और इस डील के तहत वह संसद में यूपीए सरकार के पक्ष में वोटिंग कर सकती है, जिससे सरकार गिरने से बच जाएगी और अपना शेष कार्यकाल पूरा करेगी।

सपा सांसद रेवती रमन सिंह ने कहा कि सरकार को बाहर से समर्थन देने का कोई मतलब नहीं है। ऐसे में कयास लगाया जा रहा है कि वह मंत्रिमंडल में शामिल होने को तैयार है। इस बीच, कांग्रेस शिवसेना और अकाली दल से भी बात कर रही है कि संसद में परमाणु मुद्दे पर अगर वोटिंग होती है, तो वह सदन में मौजूद न रहें। इससे कुछ उपस्थित सांसदों की संख्या कम हो जाएगी और सरकार गिरने से बच जाएगी।

सपा के 10 सांसद मंत्री पद पर आसीन हो सकते हैं। हालांकि सपा को सरकार में शामिल करने की बात पर कांग्रेस के एक मंत्री ने कहा कि ऐसा करना उचित नहीं होगा। उधर, लखनऊ में सपा सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस डील की वजह यह है कि पार्टी राज्य में बसपा और केंद्र में कांग्रेस से एकसाथ नहीं लड़ सकती। इससे सपा को चुनाव में नुकसान होने का खतरा है।

First Published - July 2, 2008 | 11:43 PM IST

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