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इधर फसल तरसे, उधर बाढ़ निगले

Last Updated- December 07, 2022 | 1:42 PM IST

उत्तर प्रदेश में बारिश का कहर थम नहीं रहा है। गुरुवार रात से 8 घंटे के विराम के बाद शुक्र्रवार दोपहर से फिर मूसलाधार बारिश का सिलसिला जारी है।


शुक्रवार सुबह से ही एल्गिन ब्रिज, जिला बाराबंकी में घाघरा, बलरामपुर और सिद्धार्थनगर में राप्ती, लखीमपुर में शारदा, गंडक, बूढ़ी गंडक और कई जगहों पर नारायणी का पानी खतरे के निशान के  पार जा चुका है। बारिश के कहर ने बाराबंकी, लखीमपुर, गोंडा, सिद्धार्थनगर, गोरखपुर, बलरामपुर और श्रावस्ती में धान की फसल चौपट कर दी है।

बारिश के मद्देनजर गुरुवार रात जहां मुख्यमंत्री मायावती ने लोक सभा चुनावों के मामले में पार्टी नेताओं से बातचीत की वहीं बाढ़ की भी समीक्षा की। मायावती ने अपने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दे कर कहा है कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत की तत्काल व्यवस्था की जाए। सरकार ने बाढ़ पीड़ित 11 जिलों के लिए 3 करोड़ और आंशिक रूप से प्रभावित 22 जिलों के लिए 2 करोड़ रुपये की व्यवस्था की है।

सरकारी प्रवक्ता के अनुसार बस्ती और गोरखपुर मंडल के 1000 गांवों के लिए मंडलायुक्तों ने बाढ़ राहत के लिए अतिरिक्त पीएसी बल की मांग की है। बरसात से इन जिलों में 728 लाख हेक्टेअर धान की फसल के नुकसान का अनुमान है। वर्षाजनित हादसों में अब तक 242 लोगों की जान जा चुकी है। सरकारी प्रवक्ता के मुताबिक वर्षाजनित हादसों के शिकार 23 लोगों को बीते 24 घंटों में आर्थिक सहायता दी गई है।

न अति भली न कम अच्छा

छत्तीसगढ़, विदर्भ, मराठावाड़ा व मध्य महाराष्ट्र आदि इलाकों में सामान्य से 60 फीसदी तक कम बारिश
कृषि उत्पादन पर पड़ सकता है असर
कई इलाकों में सूखे जैसी बन गई है स्थिति

शारदा, गंडक, बूढ़ी गंडक और कई जगहों पर नारायणी का पानी खतरे के निशान को किया पार
बाराबंकी, लखीमपुर, गोंडा, सिद्धार्थनगर, गोरखपुर, बलरामपुर और श्रावस्ती में धान की फसल को भारी नुकसान
मुख्यमंत्री ने दिए बाढ़ प्रभावित इलाकों में तत्काल राहत पहुंचाने के निर्देश

First Published - July 25, 2008 | 11:53 PM IST

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