केंद्र सरकार के प्रयासों के बाद इस्पात कं पनियों द्वारा इस्पात के दामों में कटौती करने के बाद मंदी में चल रहे रियल एस्टेट के लिए आशा की किरण दिखाई दी है।
इस क्षेत्र के विश्लेषकों का मानना है कि इससे लागत में कमी आएगी। हालांकि सीमेंट की बढ़ी कीमतें और ऊंची ब्याज दरों से अभी भी निराशा का माहौल है।
केन्द्र सरकार और इस्पात की कंपनियों के बीच प्रधानमंत्री कार्यालय में आयोजित की गई बैठक में इस्पात कंपनियों ने विभिन्न उद्योगों और ऑटो मोबाइल क्षेत्र में प्रयोग किये जाने वाले इस्पात (फ्लैट उत्पादो या हॉट रोल्ड)के दामों में 4 हजार रुपये प्रति टन और निर्माण क्षेत्र में प्रयोग किये जाने वाले इस्पात के दामों में 2 हजार रुपये प्रति टन कम कर दिये है। इस्पात के दामों में की गई यह कटौती अगले तीन माह तक जारी रहेगी।
इस साल इस्पात के दामों में लगभग 30 फीसदी की बढोतरी हो चुकी है। इस्पात के दामों में यह बढ़ोतरी रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए घाटे का सबब साबित हो रही है। इस बाबत रियल एस्टेट विश्लेषकों का मानना है कि इस्पात के दामों में कटौती होने से कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा क्योंकि रियल एस्टेट के लिए मुख्य समस्या तो सीमेंट के बढ़े हुए दाम और ऊंची ऋण ब्याज दरें है। इसी कारण निवेशक इस दौर में रियल एस्टेट क्षेत्र में निवेश करने से पीछे हट रहे है।
प्रापर्टी बिल्डर जयंत जैन का कहना है कि इस्पात के दामों में कमी होने से लागत में कटौती आएगी। यह कटौती निश्चित तौर पर बिल्डरों को सुकून देने वाली है। जयंत ने बताया कि एक मकान के निर्माण में लगभग कुल लागत का चौथा और पांचवां हिस्सा इस्पात का होता है। इसलिए इस्पात के दामों में कटौती होने से बड़ी-बड़ी रियल एस्टेट परियोजनाओं की लागत में होने वाले व्यय की काफी बचत की जा सकेगी।
लेकिन इसके बावजूद रियल एस्टेट के सामने सबसे बड़ी समस्या इस दौर में ग्राहक ढूंढना है। प्रापर्टी पंडितों की सुने तो इनके हिसाब से देश में सबसे ज्यादा संख्या में रहने वाला आम आदमी इस समय मकान खरीदना घाटे का सौदा मान रहा है। प्रापर्टी बिल्डरों के द्वारा ग्राहकों को लुभावने अवसर दिये जाने के बाद भी आपूर्ति और मांग के मध्य काफी अंतर है।
इन सभी बातों के अलावा खास बात यह है कि इस्पात कंपनियों ने केन्द्र सरकार से निर्यात शुल्कों को लागू न करने और आयरन अयस्कों की उपलब्धता बढ़ाने की मांग भी की है। अगर के न्द्र सरकार इस्पात कंपनियों की इस बात को मान लेती है तो निश्चित तौर पर आने वाले समय में इस्पात के दाम और भी कम हो सकते है जो निश्चित तौर पर रियल एस्टेट के लिए फायदेमंद साबित होगा।
इस्पात कंपनियों का कहना है कि इस्पात के दामों में हो रही यह बढोतरी बुनियादी ढांचा क्षेत्र की बढ़ती मांग और लागत के बढ़ने के कारण आ रही है। पिछले कुछ समय में सरकारी कंपनी एनएमडीसी लिमिटेड ने लौह अयस्कों के दामों में लगभग 70 फीसदी की बढ़ोतरी कर दी है। यही नही कोयले के दामों में 40 फीसदी की और बिजली के दामों में भी अप्रत्याशित बढ़ोतरी हो गई है। इसके कारण इस्पात कंपनियों को इस्पात के दामों में बढ़ोतरी करनी पड़ रही है।
केन्द्रीय इस्पात मंत्री रामविलास पासवान ने कुछ दिनों पहले इस्पात कंपनियों को अपना मुनाफा कम करने की सलाह दे डाली थी। इसके जवाब में इस्पात कंपनियों का कहना था कि भारत में इस्पात के दाम अन्तराष्ट्रीय स्तर की अपेक्षा पहले से ही 100 डालर कम है।