facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

जलवायु परिवर्तन का चाय के बागानों पर दिख रहा असर, पिछले साल के मुकाबले चाय के उत्पादन में गिरावट

Advertisement

विशेषज्ञों का दावा है कि लगातार हो रहे जलवायु परिवर्तन और मौसम में हो रहे बदलाव के चलते फसल उत्पादन प्रभावित हो रहा है।

Last Updated- December 30, 2024 | 2:25 PM IST
प्रतीकात्मक तस्वीर | फोटो क्रेडिट: Pexels

मौसम में हो रहे लगातार बदलाव और चाय बागानों के समय से पहले बंद होने के चलते इस साल के अंत तक चाय के कुल उत्पादन में 10 करोड़ किलो से अधिक की गिरावट आने की आशंका है। चाय उद्योग से जुड़े लोगों ने सोमवार को यह जानकारी दी। हालांकि, उन्होंने कहा कि इस साल फसल का दाम बेहतर मिला और निर्यात में लगातार बढ़ोतरी हुई।

उन्होंने कहा कि 2023 के पहले 10 महीनों में करीब 117.8 करोड़ किलोग्राम उत्पादन की तुलना में देश में चालू कैलेंडर वर्ष की जनवरी-अक्टूबर के बीच करीब 111.2 करोड़ किलो चाय का उत्पादन हुआ।

हालांकि, 2024 में 24-25 करोड़ किलोग्राम तक चाय निर्यात करने की उम्मीद है, जो पिछले साल करीब 23.1 करोड़ किलोग्राम रहा था।

उत्पादन में कमी, लेकिन निर्यात बेहतर

भारतीय चाय संघ के चेयरमैन हेमंत बांगड़ ने कहा कि 2024 में जनवरी से अक्टूबर के बीच चाय उत्पादन में करीब 6.6 करोड़ किलोग्राम की कमी हुई। अगर बात नवंबर की करें तो चाय के बागान बंद किए जाने से उत्पादन में 4.5 से पांच करोड़ किलोग्राम की और गिरावट आने की आशंका है।

भारतीय चाय निर्यातक संघ के चेयरमैन अंशुमान कनोरिया ने कहा कि भू-राजनीतिक चुनौतियों तथा कई आर्थिक समस्याओं के बावजूद भारत का चाय निर्यात अच्छा रहा और निर्यात में वृद्धि व्यापारियों द्वारा लिए गए कड़े फैसले की वजह से हुआ।

बांगड़ ने ‘पीटीआई’ से कहा,‘‘इस साल चाय उद्योग का प्रदर्शन बहुत अच्छा नहीं रहा। फसल उत्पादन कम रहा जबकि प्रति किलोग्राम उत्पादन लागत बढ़ी। अधिकतर लागत पहले से तय थी और कीमत में स्थिति के अनुरूप कोई वृद्धि नहीं हुई। उद्योग 2023 में घाटे में था हालांकि अब स्थिति पिछले साल से बेहतर है लेकिन उद्योग मंदी से बाहर नहीं आया है।’’

उन्होंने आगे कहा, ‘‘असम में उत्पादक कुछ मामूली लाभ कमा सकते हैं, लेकिन उत्तरी बंगाल में वे अब भी घाटे में रहेंगे। इस साल पिछले साल की तुलना में उत्पादन में 11-12 करोड़ किलोग्राम की गिरावट होगी।’’

जलवायु परिवर्तन तथा मौसम में हो रहा बदलाव जिम्मेदार

चाय अनुसंधान संघ (TRA) ने जलवायु परिवर्तन तथा मौसम में हो रहा बदलाव के चलते फसल उत्पादन प्रभावित होने का दावा करते हुए कहा कि चाय की खेती के लिए मिट्टी की गुणवत्ता बढ़ाने, वर्षा जल संचयन के जरिये जलाशयों का निर्माण करने की सलाह दी है।

TRA सचिव जॉयदीप फूकन ने कहा, ‘‘जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से भारतीय चाय तेजी से प्रतिस्पर्धा से बाहर हो रही है। इस साल कई चाय उत्पादक क्षेत्रों में तापमान 35 से 40 डिग्री सेल्सियस तक रहा और काफी लंबे समय तक वर्षा की कमी रही, जिससे गुणवत्तापूर्ण फसल के महीनों में चाय उत्पादन औसतन 20 प्रतिशत प्रभावित हुआ।’’

भारतीय चाय निर्यातक संघ के चेयरमैन अंशुमान कनोरिया ने कहा, ‘‘ इस साल चाय का निर्यात अच्छा रहा है। हम कैलेंडर वर्ष 2024 को करीब 24-25 करोड़ किलोग्राम और वित्त वर्ष 2024-25 को करीब 26 करोड़ किलोग्राम के साथ समाप्त करने की उम्मीद कर रहे हैं।

(एजेंसी के इनपुट के साथ)

Advertisement
First Published - December 30, 2024 | 2:25 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement