देश में रोजाना कोविड-19 के 12,000 से अधिक नये मामलों के बीच केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने गुरुवार को कहा कि लोगों के अस्पतालों में दाखिल होने की निगरानी करने की आवश्यकता है और इसके साथ ही जांच, निगरानी और संक्रमित नमूनों की जीनोम सीक्वेंसिंग बढ़ाने की जरूरत है। गत 24 घंटों में देश में कोविड के 13,313 मामले सामने आए हैं और इस समय देश में 83,990 संक्रमित हैं। साप्ताहिक संक्रमण दर भी 2.81 प्रतिशत है।
विशेषज्ञों के साथ चर्चा के पश्चात स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि जिन जिलों में कोविड के मामले ज्यादा सामने आ रहे हैं उन पर खास ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने आरटी-पीसीआर जांच बढ़ाने की बात भी कही। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि कोविड-19 की प्रभावी निगरानी करनी होगी और संक्रमण को समय पर रोकने के उपाय करने होंगे। विशेषज्ञों में सरकार के प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार अजय के सूद, जैव प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव राजेश गोखले, भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के महानिदेशक बलराम भार्गव, टीकाकरण पर राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार परिषद और कोविड कार्य बल के प्रमुख एन के अरोड़ा, नीति आयोग के सदस्य वी के पॉल, एनसीडीसी के निदेशक सुरजीत सिंह आदि शामिल थे।
बैठक में स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने कोविड-19 के मामलों में इजाफे के वैश्विक परिदृश्य पर एक विस्तृत प्रस्तुति दी और देश में कोविड की स्थिति के बारे में वस्तुस्थिति बताई। उन्होंने कोविड-19 के मामलों के रुझान को लेकर भी प्रस्तुति और विश्लेषण किया। रोज सामने आने वाले सक्रिय मामले, संक्रमण दर और मृत्यु के साथ ही उन्होंने जांच, राज्यवार साप्ताहिक जांच (प्रति 10 लाख पर), साप्ताहिक जांच में आरटी-पीसीआर की हिस्सेदारी, जीनोम सीक्वेंसिंग और टीकाकरण आदि का ब्योरा दिया।
मांडविया ने अधिकारियों से कहा कि वे निगरानी पर ध्यान केंद्रित रखें और वायरस के स्वरूप में किसी भी संभावित बदलाव को दर्ज करने के लिए जीनोम सीक्वेंसिंग पर भी केंद्रित रहें। उन्होंने कोविड के कारण भर्ती होने वाले लोगों, तथा इन्फ्लुएंजा के शिकार लोगों पर भी ध्यान देने की बात कही। कोविड वायरस के ओमीक्रोन प्रकार के कारण देश में इसकी तीसरी लहर आई थी और अब इसके कई उप स्वरूप चलन में हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि हर नये प्रकार के साथ वायरस के और अधिक संक्रामक होते जाने की आशंका है।
बिज़नेस स्टैंडर्ड के एक हालिया विश्लेषण से पता चला था कि कोविड-19 संक्रमण के मामले तो बढ़े हैं लेकिन इसके कारण मौतों का आंकड़ा नहीं बढ़ रहा है। अस्पतालों में भर्ती होने वालों की तादाद भी कम बनी हुई है। चेन्नई के 1.1 प्रतिशत अस्पताल बेड, दिल्ली के 2.3 प्रतिशत तथा मुंबई के 2.6 प्रतिशत अस्पताल बेड मरीजों से भरे हैं।