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ब्याज दरों में बढ़ोतरी और वैश्विक मंदी की आशंका ने बिगाड़ा रियल्टी सेक्‍टर का मूड: रिपोर्ट

Last Updated- December 11, 2022 | 1:06 PM IST

वर्ष 2022 की तीसरी तिमाही के रियल एस्टेट रियल एस्टेट सेंटीमेंट इंडेक्‍स में मामूली गिरावट आई है। हालांकि यह अभी आशावादी बना हुआ है। इस गिरावट की वजह वैश्विक आर्थिक हालात और रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण मौजूदा भू-राजनीतिक जोखिम है। लेकिन बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति ठीक होने से यह सूचकांक आशावादी बना हुआ है।
50 से ऊपर सेंटीमेंट इंडेक्‍स सकारात्मक 

संपत्ति सलाहकार फर्म नाइट फ्रैंक इंडिया और रियल एस्टेट उद्योग संगठन नारेडको के मुताबिक वर्ष 2022 की तीसरी तिमाही के लिए रियल एस्टेट सेंटीमेंट इंडेक्‍स घटकर 61 पर आ गया है। दूसरी तिमाही में यह 62 अंक पर था। इस गिरावट के बावजूद सेंटीमेंट इंडेक्‍स सकारात्मक है। सेंटीमेंट इंडेक्‍स आपूर्ति पक्ष के अंशधारकों मसलन बिल्डरों, निवेशक और वित्तीय संस्थानों के सर्वे पर आधारित है। इस सूचकांक के 50 से ऊपर होने का मतलब धारणा के सकारात्मक होने से है। वहीं इसके 50 से नीचे होने का आशय नकारात्मक सेंटीमेंट इंडेक्‍स से है।
फ्यूचर रियल एस्टेट सेंटीमेंट इंडेक्‍स 62 से गिरकर 57 पर आया

फ्यूचर सेंटीमेंट स्कोर जो अगले छह माह का परिदृश्य बताता है, सकारात्मक तो है। लेकिन मौजूदा सेंटीमेंट इंडेक्‍स जितना नहीं है। फ्यूचर सेंटीमेंट इंडेक्‍स 62 से घटकर 57 अंक पर आ गया है।  इस सेंटीमेंट इंडेक्‍स से लगता है कि चौथी तिमाही के दौरान घरों की ब्रिकी में बढ़ोतरी की रफ्तार थम सकती है। क्योंकि अब आगे त्योहारी सीजन के कारण दिए जा रहे तमाम ऑफर अक्टूबर बाद खत्म हो जाएंगे। साथ ही 190 आधार अंक ब्याज दरों में हो चुकी बढ़ोतरी का भी नकारात्मक असर आगे दिख सकता है। इसके अलावा रूस-यूक्रेन युद्ध और महंगाई के कारण भी रियल एस्टेट उद्योग की बिक्री प्रभावित हो सकती है। आवासीय क्षेत्र में तीसरी तिमाही में दूसरी तिमाही की तुलना में घरों की बिक्री और लांचिंग में कमी आई थी। हालांकि सालाना आधार पर बढ़ोतरी दर्ज की गई थी।
नाइट फ्रैंक इंडिया के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक शिशिर बैजल ने कहा कि बाहर के भू-राजनीतिक वातावरण में व्यापक परिवर्तन ने सभी अर्थव्यवस्थाओं के विकास को कम कर दिया है। इसके बावजूद बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में भारत उच्चतम जीडीपी के रूप में बना हुआ है। पिछली कुछ तिमाहियों से भारत में रियल एस्टेट में मजबूती आ रही है। हालांकि अब मुद्रास्फीति की उच्च दर के कारण होने वाली प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण और भू-राजनीतिक तनाव से फ्यूचर सेंटीमेंट इंडेक्स में गिरावट आई है। जो अगली कुछ तिमाहियों में बिल्डरों की धारणा को सामान्य रूप से प्रभावित कर सकता है। 

नारेडको के अध्यक्ष और रौनक समूह के निदेशक राजन बंदेलकर कहते हैं कि वैश्विक अनिश्चित आर्थिक स्थिति और बढ़ती मुद्रास्फीति के दबाव के बावजूद घर खरीदार बाजार में निवेश करना जारी रखेंगे। दिसंबर में ब्याज दरें फिर बढ़ सकती हैं। लेकिन इसका बिक्री पर मामूली ही असर पड़ेगा। 

First Published - October 27, 2022 | 4:51 PM IST

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