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48 साल बाद भारत कर रहा है वर्ल्ड डेयरी समिट की मेजबानी, जानिए इसके बारे में सबकुछ

Last Updated- December 11, 2022 | 3:41 PM IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज वर्ल्ड डेयरी समिट का ग्रेटर नोएडा में उद्घाटन किया। भारत करीब 48 साल बाद इस समिट की मेजबानी कर रहा है। इस समिट में पूरी दुनिया से लगभग 150 से अधिक पशु विशेषज्ञ भाग लेंगे और पशुपालकों को आधुनिक तकनीक और डेयरी की संभावनाओं के बारे में जानकारी देंगे। उद्घाटन कार्यक्रम में नरेंद्र मोदी के साथ साथ पशुपालन मंत्री पुरुषोत्तम रुपाला ने भी भाग लिया।

क्या है वर्ल्‍ड डेयरी समिट

वर्ल्‍ड डेयरी समिट पूरी दुनिया में डेयरी से जुड़े लोगों का एक सम्मेलन है। इसमें पूरी दुनिया के डेयरी और पशुपालन से जुड़े लोग, विशेषज्ञ, अधिकारी भाग लेते हैं जहां डेयरी के भविष्य, विकास को लेकर परिचर्चा होती है। इसका आयोजन विभिन्न देशों में प्रत्येक साल इंटरनेशनल डेयरी फेडरेशन करवाता है। 

यह 48 साल बाद भारत में हो रहा है। इसमें पूरी दुनिया के करीब 50 देशों के विशेषज्ञ, किसान, अधिकारी और दुग्ध उद्योग जगत के दिग्गज लोग हिस्सा लेंगे। कार्यक्रम में 50 देशों के करीब 1500 प्रतिभागी भी भाग लेंगे। यह 12 से 15 सितंबर के बीच नोएडा के इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में हो रहा है।

कब से हो रहा है

वर्ल्‍ड डेयरी समिट का आयोजन प्रत्येक साल इंटरनेशनल डेयरी फेडरेशन के द्वारा किसी न किसी देश में किया जाता है। 1903 में इंटरनेशनल डेयरी फेडरेशन की स्थापना के साथ ही हरेक साल इसका आयोजन किया जाता है। भारत में यह दूसरी बार आयोजित किया जा रहा है। इससे पहले इसका आयोजन 1974 में भारत में हुआ था। 

भारत को क्या फायदा मिलेगा

भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है। पूरे विश्व के दूध उत्पादन में भारत की हिस्सेदारी 23 प्रतिशत है। भारत में सालाना करीब 210 मिलियन टन दूध का उत्पादन होता है और इससे 8 करोड़ डेयरी किसान जुड़े हैं। सरकार ने पिछले कुछ वर्षो में डेयरी क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए कई कदम भी उठाए हैं। इसके परिणामस्वरूप पिछले आठ वर्षों में दूध उत्पादन में 44 प्रतिशत से अधिक वृद्धि हुई है। इस समिट में पूरी दुनिया से विशेषज्ञ, डेयरी उद्योग से जुड़े लोग आएंगे जो पशुपालन और तकनीक के सहारे डेयरी को सशक्त करने की कोशिश कर रहे हैं। इसके साथ साथ इस समिट में बड़ी प्रदर्शनी भी लगी है जिसमें डेयरी उद्योग से जुड़ी बातें बताई गई है। इससे भारतीय पशुपालन और डेयरी उद्योग से जुड़े लोगों को फायदा मिल सकता है।
अभी भी भारतीय डेयरी उद्योग पुरानी और पारंपरिक चीजों पर ही टिका है। भारतीय पशुपालक टेक्नोलॉजी पर निर्भर नहीं के बराबर है। इस समिट में उन्हें दुनिया की सर्वोत्तम टेक्नोलॉजी, सिस्टम, डेयरी उद्योग की संभावनाओं के बारे में  जानकारी मिल सकती है।

क्या है उद्देश्य 

इंटरनेशनल डेयरी फेडरेशन के अनुसार इस समिट करवाने का उद्देश्य पूरी दुनिया में पशुपालन और डेयरी से जुड़े लोगों का प्रशिक्षण, डेयरी उद्योग की चुनौतियों को कम करना तथा टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देना है। इसके साथ साथ इंटरनेशनल डेयरी फेडरेशन डेयरी उद्योग से जुड़े लोगों तथा पशु पालकों का प्रशिक्षण भी करवाती है। 

टेक्नोलॉजी पर जोर

अपने संबोधन भाषण में प्रधानमंत्री ने टेक्‍नोलॉजी पर जोर देते हुए कहा कि टेक्‍नोलॉजी ने किसानों का काम आसान किया है। टेक्‍नोलॉजी के माध्‍यम से तकरीबन 74 लाख किसान जुड़े हैं। प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि भारत में डेयरी उद्योग की रफ्तार तेजी से बढ़ रही है। हम इस मामले में दुनिया से काफी आगे हैं। जहां पूरी दुनिया में डेयरी उद्योग 2 प्रतिशत की दर से आगे बढ़ रही है वहीं भारत में यह 6 प्रतिशत के दर से आगे बढ़ रही है। उन्होंने यह भी बताया कि यह हमारे लिए गर्व का विषय है कि डेयरी उद्योग से जुड़े कामगारों में 70 प्रतिशत से अधिक महिलाएं हैं।

First Published - September 12, 2022 | 1:25 PM IST

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