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आबादी में चीन को पछाड़ देगा भारत!

Last Updated- December 11, 2022 | 5:40 PM IST

भारत अगले साल चीन को पछाड़कर दुनिया का सबसे ज्यादा आबादी वाला देश हो जाएगा। सोमवार को जारी संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में यह कहा गया है। संयुक्त राष्ट्र के आर्थिक और सामाजिक मामलों के विभाग के जनसंख्या अनुभाग की रिपोर्ट – विश्व जनसंख्या संभावना-2022 में कहा गया है कि वर्ष 2023 के दौरान दुनिया के सर्वाधिक जनसंख्या वाले देश के रूप में भारत के चीन से आगे निकलने की संभावना है।
रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2022 में भारत की आबादी (1.412 अरब) चीन की आबादी (1.426 अरब) की तुलना में कुछ ही कम होगी तथा वर्ष 2050 में देश की जनसंख्या 1.668 अरब होने का अनुमान है, जो चीन की 1.317 अरब आबादी से काफी ज्यादा होगी।
संयुक्त राष्ट्र के ये अनुमान भारत सरकार के राष्ट्रीय जनसंख्या आयोग (एनसीपी) द्वारा गठित जनसंख्या अनुमानों की एक तकनीकी समिति द्वारा जुलाई 2020 में पेश किए गए अनुमानों से अधिक है। उस रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2022 में भारत की आबादी 1.37 अरब और वर्ष 2023 में 1.39 अरब हो जाएगी तथा वर्ष 2025 तक देश की आबादी 1.41 अरब होगी।
उस समिति के सदस्य और अब वर्ल्ड रिसोर्स सेंटर के फेलो अमिताभ कुंडू ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया ‘जहां तक जनसंख्या अनुमानों का संबंध है, हमारा प्रारूप काफी दमदार था। हमने काफी गंभीरता से ध्यान रखा है। विशेषज्ञ समूह द्वारा जताए गए अनुमान संयुक्त राष्ट्र की विश्व जनसंख्या संभावनाओं के मुकाबले काफी ज्यादा भरोसेमंद हैं। संयुक्त राष्ट्र के अनुमान व्यापक विचारों पर अधिक आधारित हैं, जबकि भारतीय जनसांख्यिकीय अनुमान कहीं ज्यादा दमदार हैं।’
हालांकि उन्होंने इस बात पर सहमति जताई कि अगले साल तक भारत की आबादी चीन से आगे निकल जाएगी। उन्होंने कहा ‘इसमें हैरानी की बात नहीं है, क्योंकि भारत में जनसंख्या वृद्धि दर इस वक्त चीन के मुकाबले काफी ज्यादा है। हमने तब (जब समिति ने अपनी रिपोर्ट तैयार की) सोचा था कि भारत निश्चित रूप से इस साल या अगले साल की शुरुआत में चीन से आगे निकल जाएगा। यह एक सच्चाई है।’
तकनीकी समिति ने भारत की जनसंख्या वर्ष 2011 के 1.21 अरब से बढ़कर वर्ष 2026 में 1.52 अरब होने का अनुमान जताया है, जो 25 वर्षों में एक प्रतिशत वार्षिक दर के साथ 25.7 प्रतिशत की उछाल है।
भारत के आर्थिक विकास के निहितार्थ
पूर्व मुख्य सांख्यिकीविद प्रणव सेन ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया कि विस्तृत स्तर पर किसी देश की आबादी जितनी ज्यादा होगी, उसे उतने ही ज्यादा लोगों को आश्रय देना होगा। इसका मतलब यह है कि किसी भी प्रति व्यक्ति आय के लिए लोगों की उत्पादकता बढ़ानी होगी।
अलबत्ता जो बात इससे भी ज्यादा महत्त्वपूर्ण है, वह है कुल आबादी में कामकाजी आयु वाले लोगों का हिस्सा।
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में देशों के लिहाज से कामकाजी आयु वाली आबादी का जिक्र तो नहीं किया गया है, लेकिन कहा गया है कि मध्य और दक्षिणी एशिया के साथ-साथ उत्तरी अफ्रीका और पश्चिमी एशिया में कुछ समय के लिए कामकाजी आयु वर्ग का अनुपात बढ़ता रहेगा। इन क्षेत्रों में कामकाजी आयु वाली आबादी में वर्ष 2045 तक ही गिरावट आनी शुरू होगी।
सेन, जो फिलहाल इंटरनैशनल ग्रोथ सेंटर में कार्यक्रम निदेशक हैं, ने कहा कि चीन के मुकाबले भारत में कामकाजी आयु वाले लोगों का अनुपात काफी ज्यादा है और इसी वजह से इसे जनसांख्यिकीय लाभ मिलने की उम्मीद है।
इसके अलावा श्रम बल भागीदारी दर (एलएफपीएफ) भी महत्त्वपूर्ण होती है, जो काम करने के इच्छुक श्रमिक वर्ग का अनुपात होता है। सेन ने कहा कि एलएफपीआर भारत में 42 प्रतिशत है, जबकि चीन में यह 65 फीसदी से ज्यादा है। ऐसा मुख्य रूप से इस वजह से है, क्योंकि भारत में महिला की एलएफपीआर कम है, जो तकरीबन 25 प्रतिशत ही है।
इसी वजह से नीतियों पर भली-भांति विचार करना होगा। सेन ने कहा कि अगर आप ऐसी नीतियां बनाते हैं, जो कुल रोजगार में इजाफा किए बिना ही महिला एलएफपीआर बढ़ाती है, तो पुरुष एलएफपीआर कम हो जाएगी। इसलिए आपको नौकरियां बढ़ाने वाली नीतियों की आवश्यकता है और फिर महिलाओं को श्रम बल में शामिल होने के लिए आगे लाएं।
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि नवंबर 2022 के मध्य तक दुनिया की आबादी आठ अरब तक पहुंचने का अनुमान है। रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक जनसंख्या 1950 के बाद से सबसे धीमी रफ्तार से बढ़ रही है, जो वर्ष 2020 में एक प्रतिशत से कम हो गई है।
वर्ष 2022 में दुनिया के सर्वाधिक आबादी वाले दो क्षेत्र पूर्वी और दक्षिणपूर्वी एशिया रहे, जहां 2.3 अरब लोग हैं। ये क्षेत्र 29 प्रतिशत वैश्विक आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं तथा 2.1 अरब आबादी वाला मध्य और दक्षिणी एशिया क्षेत्र विश्व की कुल जनसंख्या के 26 प्रतिशत भाग का प्रतिनिधित्व करता है। वर्ष 2022 में इन क्षेत्रों में सर्वाधिक जनसंख्या के लिहाज से चीन और भारत की हिस्सेदारी रही, जो दोनों के ही मामले में 1.4 अरब से अधिक है।

First Published - July 11, 2022 | 11:09 PM IST

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