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प्रमाण पत्र में देर से उद्योग को परेशानी

Last Updated- December 11, 2022 | 5:43 PM IST

नए उत्पादों के लिए पंजीकरण प्रमाणपत्र हासिल करने में हो रही देरी के कारण 40,000 करोड़ रुपये का भारतीय कीटनाशक और पौध संरक्षण उद्योग  परेशान है। कीटनाशकों के कंप्यूटरीकृत पंजीकरण (क्रोप) और प्लांट क्वारंटीन इन्फॉर्मेशन सिस्टम (पीक्यूआईएस) के लिए हाल ही में शुरू किया गया पोर्टल कथित रूप से सही तरीके से काम नहीं कर रहा है।
यह पोर्टल अप्रैल  2022 में पेश किए गए थे। इसका मकसद पारदर्शी व्यवस्था मुहैया कराना था, जिसमें आवेदकों के लिए कोई भौतिक टचप्वाइंट नहीं हो और इस्तेमाल करने वालों की सुविधा सुनिश्चित हो सके।
ऑनलाइन व्यवस्था से ही ई-भुगतान और दस्तावेज जमा करने, ऑनलाइन मान्यता और नवीकरण के साथ प्रमाणपत्र डाउनलोड करने की सुविधा दी गई थी।
बहरहाल उद्योग में काम करने वालों ने आरोप लगाए कि दोनों पोर्टल सही तरीके से काम नहीं कर रहे हैं, जिसकी वजह से पंजीकरण प्रमाणपत्र जारी होने में देरी हो रही है, जिनका निर्यात होने के साथ घरेलू इस्तेमाल होना है।
इस उद्योग से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि जब तक कि तेजी से समस्या हल नहीं हो जाती, उद्योग को भय है कि इससे कोई नया पौध संरक्षण रसायन किसानों के लिए इस खरीफ सत्र में उपलब्ध नहीं हो पाएगा।
उद्योग में काम करने वालों का कहना है कि इसका असर उपज पर पड़ सकता है क्योंकि फसलों पर पिछले कुछ साल से नए किस्म के कीटों के हमले हो रहे हैं।
इस प्रक्रिया को तेज करने के लिए पौध संरक्षण उद्योग के एक वर्ग ने हाल में सरकार से संपर्क साधा था और अपनी चिंता का उल्लेख करते हुए ज्ञापन भी सौंपा था।

First Published - July 8, 2022 | 12:16 AM IST

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