केरल के कोल्लम जिले की वट्टाकयल झील का कायाकल्प कर जल्द ही इसे भारत के पर्यटन मानचित्र पर अहम जगह दिलाई जाएगी।
जिले में एक पर्यावरण संरक्षण संस्था के प्रयासों से इस झील में जल्द ही अर्द्ध-सैनिक बल के जवान तैराकी का प्रशिक्षण लेते नजर आएंगे।
गोल आकार वाली वट्टाकयल झील यहां की पर्यावरण संरक्षण संस्था ‘वट्टाकयल संरक्षण प्रादेशिक विकासना समिति’ की विशेष पहल के कारण सुर्खियों में आ गई है।
यह समिति एक पर्यावरण क्लब का नेतृत्व करती है जो ताजा पानी की इस झील के आसपास संरक्षण और विकास गतिविधियों में सक्रिय है।
वट्टाकयल संरक्षण प्रादेशिक विकासना समिति के सचिव जयन पोंगदा ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘समिति ने देश के अर्द्ध-सैनिक बलों को प्रशिक्षित किए जाने के लिए वट्टाकयल झील को एक तरणताल में परिवर्तित किए जाने का प्रस्ताव भेजा है जो रक्षा मंत्रालय के विचाराधीन है।’
जयन ने बताया कि जब इस प्रस्ताव को जल्द ही मंजूरी मिलने की संभावना है। मंत्रालय की मंजूरी मिलने के बाद इस झील का कायाकल्प किया जाएगा।
रक्षा मंत्रालय की मंजूरी मिलने का मतलब यह होगा कि इस झील को एक तरणताल में तब्दील किए जाने के लिए इस पर 300 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा।
जयन ने बताया कि 40 एकड़ की परिधि में फैली इस झील को निवेश से फायदा पहुंचेगा। इस झील के पश्चिमी हिस्से का इस्तेमाल तैराकी प्रशिक्षण इकाई के रूप में किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि वट्टाकयल झील को केरल की पांच लोकेशनों में शामिल किया गया है जिनमें तिरूवनंतपुरम की वेली लेक भी शामिल है।
इस प्रशिक्षण इकाई के उद्देश्य के बारे में जिक्र करते हुए अर्द्ध-सैनिक बल के एक सूत्र ने कहा कि इस प्रशिक्षण इकाई नेशनल डिजास्टर रेस्पोंस फोर्स को प्रशिक्षण मुहैया कराने वाले एक सामान्य प्रशिक्षण केंद्र के तौर पर काम करेगी जिसमें सीआरपीएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी और सीआईएसएफ शामिल होंगे।
वट्टाकयल संरक्षण प्रादेशिक विकासना समिति की ओर से की जा रही इस विशेष पहल को स्थानीय विधायक और केरल के जल संसाधन मंत्री एन. के. प्रेमचंद्रन का भी समर्थन मिल रहा है। इसके अलावा श्रम मंत्री और राजस्व मंत्री ने भी इस योजना में दिलचस्पी दिखाई है।
वहीं कोल्लम की जिला पर्यटन प्रोत्साहन परिषद (डीटीपीसी) के समर्थन से समिति इस झील को उत्कृष्ट पर्यटन ठिकाने के तौर पर भी विकसित करना चाहती है।
अगर तैराकी प्रशिक्षण इकाई के लिए मंत्रालय की मंजूरी मिल जाती है तो इससे वट्टाकयल के आसपास पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है।