नोएडा के सेक्टर-93ए में स्थित सुपरटेक ट्विन टावर (Supertech Twin Tower) 28 अगस्त यानी रविवार को 02:30 बजे ध्वस्त कर दिया गया। भारत में पहली बार इतने बड़े टॉवर को ध्वस्त किया गया है। 40 मंजिला टावरों को एडिफिस इंजीनियरिंग द्वारा विस्फोट करके गिराया गया।
सुरक्षा के लिहाज से ट्विन टॉवरों को ध्वस्त करने से पहले आस-पास की इमारतों के निवासियों और सभी जीवित प्राणियों को उस क्षेत्र से बाहर निकाल दिया गया और साथ ही धमाके को देखते हुए अस्थायी रूप से इलाके को नो-फ्लाई जोन भी घोषित किया।
सुपरटेक ट्विन टावर डिमोलिशन (Supertech Twin Tower Demolition) से जुड़ी जाने ये जरूरी बातें:
1. नोएडा के सेक्टर-93ए स्थित सुपरटेक के ट्विन टावरों को गिराने के लिए वाटरफॉल इंप्लोजन तकनीक (Waterfall Implosion Technique) का प्रयोग किया गया। इस तकनीक से ट्विन टावर ताश के पत्तों की तरह महज 9 सेकंड में धूल और मलबे में बदल गया।
2. एडिफिस इंजीनियरिंग के पार्टनर उत्कर्ष मेहता के अनुसार, उन्हें दो मुख्य चुनौतियों का सामना करना पड़ा- पहली, टावर के आस-पास की आवासीय इमारतें और दूसरी, टावर के नीचे से जा रही गैस पाइपलाइन।
3. Supertech Twin Tower Demolition के लिए एडिफिस इंजीनियरिंग ने दक्षिण अफ्रीका स्थित जेट डिमोलिशन का सहयोग लिया है।
4. सुरक्षा के लिहाज से, विस्फोट के दौरान मलबे को इधर-उधर उड़ने से रोकने के लिए पूरे टावर को तार की जाली की चार परतों और जिओ टेक्सटाइल कपड़े की चार परतों में कवर किया। जिओ टेक्सटाइल एक खास फैब्रिक है जो कि लचीला होता है, इससे विस्फोट के बाद शुरूआती मलबे को इसी कपड़े में एकत्र किया जा सकेगा।
5. ट्विन टावर ढहाने से कंपन न हो इसलिए इमारत के चारों तरफ कुशन लगवाए गए। इससे मलबा भी कम होगा और निकलने वाले मलबे को कुशन ज्यादा फैलने से रोकेगा।