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जुलाई में कई क्षेत्रों में कम बारिश

Last Updated- December 15, 2022 | 4:10 AM IST

भारत का दक्षिण पश्चिम मॉनसून जून की मजबूत शुरुआत के बाद जुलाई में देश के कुछ इलाकों में सुस्त पड़ गया। इसकी वजह से पहले महीने में हुआ पूरा लाभ खत्म होता नजर आ रहा है। भारतीय मौसम विभाग के हाल के आंकड़ों से यह जानकारी मिलती है।
अब तक (28 जुलाई) भारत में करीब 425.5 मिलीमीटर बारिश हुई है, जो महज सामान्य है। जून के अंत तक देश में सामान्य से 18 प्रतिशत ज्यादा बारिश हुई थी, जो पिछले कुछ वर्र्षों की सबसे बेहतरीन बारिश थी।
उसके बाद पूर्वी और उत्तर पूर्वी भारत में बेहतरीन बारिश हुई है, जिससे उन इलाकों में बाढ़ आ गई है, वहीं मध्य और उत्तर भारत के कई इलाकों में बारिश की फुहारें रुक गई हैं।
इस तरह से जून में जो बढ़त दिख रही थी, वह खत्म होती नजर आ रही है।
बहरहाल ज्यादातर मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अगस्त के पहले सप्ताह में उत्तर और मध्य भारत में दक्षिण पश्चिम मॉनसून की रिकवरी की उम्मीद है और इससे सामान्य से अधिक बारिश बहाल होने में मदद मिलेगी। इसका यह भी मतलब है कि जुलाई महीने में भारत में बारिश मौसम विभाग के अनुमान की तुलना में कम हो सकती है।
जून में दूसरा अनुमान जारी करते समय मौसम विभाग ने कहा था कि जुलाई में दीर्घावधि औसत (एलपीए) का 103 प्रतिशत बारिश होगी। दक्षिण पश्चिम मॉनसून के हिसाब से जुलाई और अगस्त दो महत्त्वपूर्ण महीने हैं, क्योंकि इन्लहीं दो महीनों में सबसे ज्यादा बारिश होती है।
1 जून से जुलाई के बीच देश के 685 जिलों में से करीब 32 प्रतिशत जिलों में पर्याप्त बारिश नहीं हुई है, जबकि शेष जिलों में सामान्य या सामान्य से अधिक बारिश हुई है।
जिन जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई है, उनमें से ज्यादातर जिले उत्तर प्रदेश (28), राजस्थान (24) और गुजरात (18) के हैं।
स्काईमेट वेदर के मौसम विभाग और जलवायु परिवर्तन के वाइस प्रेसिडेंट महेश पालावत ने कहा, ‘जुलाई में मॉनसून उम्मीद के कुछ विपरीत रहा है। अल नीनो निरपेक्ष बना रहा और वह ला नीना में परिवर्तित नहीं हुआ, जैसी कि उम्मीद की जा रही थी। लेकिन अगस्त में बेहतर बारिश की संभावना है और उत्तर-पश्चिम भारत के राज्यों पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश दिल्ली आदि इलाकों में जोरदार बारिश के अनुमान हैं, जिससे स्थिति में सुधार होगी। सथ ही मध्य भारत के इलाकों में भी बेहतर बारिश के अनुमान हैं।’
जुलाई महीने में दक्षिण पश्चिमी मॉनसून में कमी से खरीफ फसलों की बुआई पर बहुत ज्यादा असर पडऩे की संभावना नहीं है
24 जुलाई तक खरीफ की फसलों की बुआई करीब 799.5 लाख हेक्टेयर थी, जो पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 18.5 प्रतिशत से ज्यादा है, जिसमें दलहन और तिलहन की बुआई ज्यादा हुई है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘मॉनसून में थोड़ा विराम होगा और इसमें चिंता की कोई बात नहीं है क्योंकि बारिश रुकना सामान्य बात है।’

First Published - July 28, 2020 | 11:37 PM IST

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