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जीवन बीमाकर्ताओं को मिले 31,254 करोड़ रुपये

Last Updated- December 11, 2022 | 5:43 PM IST

जून महीने में जीवन बीमा उद्योग ने नए बिजनेस प्रीमियम में 4.14 प्रतिशत की मामूली वृद्धि दर्ज की है। मुख्य रूप से भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के प्रीमियम में आए संकुचन के कारण ऐसा हुआ है। हालांकि अप्रैल-जून तिमाही (वित्त वर्ष 2023 की पहली तिमाही) के दौरान नए बिजनेस प्रीमियम (एनबीपी) में पिछले साल की समान अवधि की तुलना में कम आधार के चलते 40 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई है।
जून महीने में जीवन बीमाकर्ताओं को 31,254.55 करोड़ रुपये एनबीपी के रूप में मिले हैं जिसमें पिछले साल की समान अवधि की तुलना में महज 4.14 प्रतिशत वृद्धि हुई है। निजी बीमाकर्ताओं के एनबीपी में 29 प्रतिशत वृद्धि हुई है और यह 10,610.89 करोड़ रुपये रहा है, वहीं एलआईसी का एनबीपी 5 प्रतिशत घटकर 20,643.67 करोड़ रुपये रह गया है। जीवन बीमा काउंसिल के आंकड़ों से यह पता चलता है। एलआईसी के एनबीपी में कमी में अहम भूमिका ग्रुप सिंगल प्रीमियम में जून में पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 10 प्रतिशत की गिरावट रही है। प्रीमियम में गिरावट की वजह जानने के लिए एलआईसी को भेजे गए ई-मेल का कोई उचित जवाब नहीं मिल सका। एलआईसी के शेयर आज दोपहर बाद 0.23 प्रतिशत गिरकर 701.45 रुपये पर बिक रहे थे।
अन्य बड़े बीमाकर्ताओं में एसबीआई लाइफ के एनबीपी में जून में करीब 60 प्रतिशत वृद्धि हुई है। मुख्य रूप से ग्रुप सिंगल प्रीमियम और इंडिविजुअल नॉन सिंगल प्रीमियम में बढ़ोतरी की वजह से ऐसा हुआ है। इस अवधि के दौरान एचडीएफसी लाइफ का एनबीपी 11 प्रतिशत बढ़ा है। बहरहाल आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ के एनबीपी में इस अवधि के दौरान 14.5 प्रतिशत की गिरावट आई है।
पिछले साल वित्त वर्ष के पहले दो महीनों अप्रैल और मई पर लॉकडाउन की मार पड़ी थी, क्योंकि कोविड-19 की दूसरी घातक लहर का व्यापक असर था। लेकिन जून और उसके बाद से स्थिति में सुधार हुई, जब अर्थव्यवस्था खुलनी शुरू हो गई। इस साल अप्रैल और मई महीने में जीवन बीमाकर्ताओं के प्रीमियम में जोरदार वृद्धि नजर आ रही है क्योंकि पिछले साल का आधार कम था। अप्रैल में बीमाकर्ताओं का एनबीपी 84 प्रतिशत बढ़ा है और मई में 88 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
एलआईसी के लिए जून निराशाजनक रहने के बावजूद पहली तिमाही में इसका एनबीपी पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 35 प्रतिशत बढ़कर 48,201 करोड़ रुपये हो गया है। लेकिन निजी क्षेत्र के बीमाकर्ताओं ने एलआईसी को पीछे छोड़ दिया और उनके एनबीपी में 48 प्रतिशत से ज्यादा की वृद्धि हुई है। इसकी वजह से उद्योग का एनबीपी करीब 40 प्रतिशत बढ़ा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जीवन बीमाकर्ताओं के प्रीमियम में मजबूत वृद्धि इस साल बनी रहेगी, क्योंकि यह पहला साल है, जब कोई प्रतिबंध नहीं लगा है। यह उम्मीद की जा रही है कि टर्म, एन्युटी और गारंटीशुदा उत्पादों की वृद्धि तेज बनी रहेगी, वहीं शेयर बाजारों में उतार चढ़ाव के कारण यूनिट लिंक्ड  उत्पादों पर थोड़ा असर पड़ सकता है।

First Published - July 8, 2022 | 12:13 AM IST

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