कफ सिरप विवाद के गहराने पर राष्ट्रीय औषधि नियामक और हरियाणा राज्य औषधि नियंत्रक ने मेडन फार्मास्युटिकल्स के सोनीपत संयंत्र में विनिर्माण संबंधी सभी गतिविधियों पर बुधवार को रोक लगा दी। इस बीच कफ सिरप के कारण गाम्बिया में मौत की खबर के बाद कई राज्यों के खाद्य एवं औषधि आयुक्तों की कार्रवाई में भी तेजी दिखने लगी है। वे विभिन्न ब्रांडों के कफ सिरप का नमूना बाजार से एकत्रित कर उनकी जांच कर रहे हैं।
दक्षिण के राज्य भी इस मामले में सक्रिय हो गए हैं। स्टॉक में मौजूद दवाओं के नमूने लिए जा जाएंगे और जांच के नतीजों के बाद कार्रवाई की जाएगी। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों ने पुष्टि की है कि केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन और हरियाणा के राज्य औषधि नियंत्रक ने स्थानीय जांच के दौरान पाई गई खामियों के आधार पर मेडन फार्मास्युटिकल्स के सोनीपत संयंत्र में उत्पादन संबंधी गतिविधियों पर फिलहाल रोक लगा दी है।
कफ सिरप विवाद के गहराने पर राष्ट्रीय औषधि नियामक और हरियाणा राज्य औषधि नियंत्रक ने बुधवार को मेडन फार्मास्युटिकल्स के सोनीपत संयंत्र में विनिर्माण संबंधी सभी गतिविधियों पर रोक लगा दी। इस बीच कफ सिरप के कारण मौत की खबर फैलने के बाद कई राज्यों के खाद्य एवं औषधि आयुक्तों की कार्रवाई में भी तेजी दिखने लगी है। वे विभिन्न ब्रांडों के कफ सिरप के नमूने बाजार से एकत्रित कर उनकी जांच कर रहे हैं।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों ने पुष्टि की है कि केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) और हरियाणा के राज्य औषधि नियंत्रक ने स्थानीय जांच के दौरान पाई गई खामियों के आधार पर मेडन फार्मास्युटिकल्स के सोनीपत संयंत्र में उत्पादन संबंधी गतिविधियों पर फिलहाल रोक लगा दी है। पिछले सप्ताह विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने गाम्बिया में हुई 66 बच्चों की मौत का संबंध मेडन फार्मा के सोनीपत संयंत्र में बने कफ सिरप से होने की बात कही थी।
उसके बाद मेडन फार्मा सुर्खियों में आ गई और उसकी मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही है। सोनीपत के वरिष्ठ औषधि नियंत्रण अधिकारी राकेश दहिया और सीडीएससीओ के गाजियाबाद क्षेत्रीय कार्यालय के औषधि निरीक्षक संदीप कुमार एवं देवेंद्र प्रताप सिंह की टीम ने 1 और 3 अक्टूबर को मेडन फार्मा के सोनीपत संयंत्र का निरीक्षण किया।
हरियाणा के राज्य औषधि नियंत्रक सह लाइसेंसिंग अधिकारी ने 7 अक्टूबर को औषधि विनियम, 1945 के नियम 85 (2) के तहत एक कारण बताओ नोटिस जारी कर कंपनी से पूछा है कि उसके विनिर्माण लाइसेंस को क्यों न निलंबित अथवा रद्द कर दिया जाए।
कंपनी को सात दिनों के भीतर नोटिस का जवाब देने के लिए कहा गया है और यदि ऐसा नहीं किया गया तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। कंपनी के विनिर्माण लाइसेंस को रद्द अथवा निलंबित किए जाने पर राज्य लाइसेंसिग अधिकारी द्वारा निर्णय लेने में दो दिन अभी बाकी है। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने पाया कि कफ सिरप में इस्तेमाल की जाने वाली सामग्री प्रोपीलीन ग्लाइकॉल के इनवॉइस से बैच संख्या, मियादी एवं विनिर्माण की तारीख, विनिर्माता के नाम आदि गायब थे।
निरीक्षण अधिकारियों ने पाया कि मेडेन फार्मा ने डाइएथिलीन ग्लाइकॉल और एथिलीन ग्लाइकॉल के लिए प्रोपीलीन ग्लाइकॉल की गुणवत्ता जांच भी नहीं कराई थी। कंपनी दवाओं के विनिर्माण एवं जांच से संबंधित उपकरणों की कार्यपुस्तिका को प्रस्तुत करने में भी विफल रही।
विशेषज्ञ समिति गठित
केंद्र सरकार ने डब्ल्यूएचओ द्वारा दी गई जानकारी के संबंध में खामियों की जांच एवं विश्लेषण करने के लिए एक विशेषज्ञ समिति गठित की है। इमसें स्टैंडिंग नैशनल कमेटी ऑन मेडिसन के वाइस चेयरपर्सन डॉ. वाईके गुप्ता, पुणे के आईसीएमआर के एनआईवी डॉ. प्रयाग डी यादव, नई दिल्ली के एनसीडीसी के महामारी विज्ञान विभाग की डॉ. आरती बहल और सीडीएससीओ के संयुक्त औषधि नियंत्रक एके प्रधान शामिल हैं। सरकारी अधिकारियों ने संकेत दिया कि यही समिति सीडीएससीओ को आगे की कार्रवाई के बारे में सलाह देगी।
एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि डब्ल्यूएचओ ने कहा है कि मेडन फार्मा के कफ सिरप के 23 नमूनों का परीक्षण किया गया जिसमें से 4 नमूनों में डाइएथिलीन ग्लाइकॉल और एथिलीन ग्लाइकॉल की मात्रा पाई गई। उन्होंने कहा, ‘डब्ल्यूएचओ ने अभी विश्लेषण प्रमाण पत्र जारी नहीं किया है। उसने कहा है कि जल्द ही उसे उपलब्ध कराया जाएगा।’ उन्होंने कहा कि सीडीएससीओ द्वारा इस संबंध में दो बार आग्रह किए जाने के बावजूद डब्ल्यूएचओ ने बच्चों की मौत का एक-एक कर सटीक कारण उपलब्ध नहीं कराया है।
राज्यों के एफडीए सक्रिय
कफ सिरप में विषैले पदार्थों का डर फैलने के साथ ही राज्यों के एफडीए की सक्रियता बढ़ गई है। कफ सिरप में जहरीले अथवा दूषित पदाथों की मौजूदगी की जांच के लिए उन्होंने बाजार से सभी ब्रांडों के नमूने लेने शुरू कर दिए हैं। मेडन फार्मा को चार कफ सिरप के केवल निर्यात के लिए लाइसेंस दिए गए थे। कंपनी का कहना है कि उन दवाओं को भारत में नहीं बेचा गया है।
उत्तर प्रदेश के डिप्टी औषधि नियंत्रक एके जैन ने कहा कि उन्होंने राज्य के सभी फील्ड ऑफिसरों को कफ सिरप के नमूने जुटाने के लिए कहा है। दक्षिण के राज्य भी इस मामले में सक्रिय हो गए हैं। एहतियात के तौर पर उन्होंने मेडन फार्मा की दवाओं की बिक्री पर रोक लगा दी है। स्टॉक में मौजूद दवाओं के नमूने लिए जा जाएंगे और जांच के नतीजों के बाद कार्रवाई की जाएगी। पिछले नौ महीनों में कम से कम 5 ऐसे मौके थे जब कंपनी की बनाई टाइप-2 मधुमेह की दवा और दुकान पर बेची जाने वाली दर्द निवारक दवाओं को जांच के दौरान घटिया पाया गया। इनमें मेटोमिन टैबलेट के नमूने शामिल थे।