टी-20 के नए अवतार के रूप में चर्चित डीएलएफ प्रीमियर लीग के टीम मालिकों के बीच विवाद शुरू हो गया है।
इसकी वजह है- टीम मालिकों की ओर से खर्च की जाने वाली राशि। दरअसल, बीसीसीआई ने यह तय किया था कि कोई भी टीम मालिक खिलाड़ियों को अपने टीम में शामिल करने के लिए 20 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च नहीं कर सकता है।
फरवरी में इसी के तहत टीम मालिकों ने खिलाड़ियों के लिए बोली लगाई थी। लेकिन अब कुछ फ्रेंचाइजी ओनर इसमें बदलाव की मांग कर रहे हैं। कुछ का कहना है कि रकम खर्च करने की पाबंदी को बढ़ाया जाए या फिर इसे हटा दिया जाए, वहीं कुछ का कहना है कि इसे लागू रखना चाहिए।
रॉयल चैलेंजर्स (बेंगलुरु टीम) के मालिक विजय माल्या का कहना है कि रकम खर्च करने की सीमा बढ़ानी चाहिए, जबकि दिल्ली टीम के ओनर जीएमआर ग्रुप और कोलकाता टीम के ओनर शाहरुख खान इस पाबंदी को कायम रखने के पक्ष में हैं।
यूबी ग्रुप के प्रेसिडेंट विजय रेखी का कहना है कि बेहतर प्रदर्शन नहीं करने वाले खिलाड़ियों को हम हटाने की सोच रहे हैं, लेकिन इनसे तीन सालों का करार किया गया है। ऐसे में उनकी जगह नए खिलाड़ियों को टीम में शामिल करने के लिए 20 करोड़ रुपये की रकम पर्याप्त नहीं है। जीएमआर स्पोट्र्स के सीईओ योगेश शेट्टी का कहना है कि जब शुरुआत में ही स्पष्ट नियम बना दिए गए थे, तो अब इसमें परिवर्तन करने की क्या जरूरत है।
उनका कहना है कि रकम की सीमा तय करने का मकसद यह था कि सभी टीमों में नामी और नए खिलाड़ियों का संतुलन हो। शाहरुख खान की कोलकाता नाइट राइडर्स टीम के प्रवक्ता का कहना है कि रकम की सीमा को ध्यान में रखते हुए ही टीम का गठन किया गया। अब इसमें फेर-बदल करना उचित नहीं होगा। हालांकि बोर्ड इस बारे में कोई निर्णय नहीं ले पाया है। आईपीएल के कमिश्नर ललित मोदी ने कहा कि बोर्ड का इस बारे में नई नीति बनाने का फिलहाल कोई इरादा नहीं है।
वर्तमान नियम के तहत रकम खर्च करने की सीमा ही लागू होगी। नियम के मुताबिक, कुल आठ टीमों के मालिक देश-विदेश के 80 खिलाड़ियों में से अपने टीम का गठन किया था। बीसीसीआई के मुताबिक, प्रत्येक टीम में 16 खिलाड़ियों को रखने की बात थी, जिनमें से चार विदेशी, आठ इंडियन टीम के और चार नई प्रतिभाओं को शामिल करना अनिवार्य था। इसी के तहत टीमों के मालिकों ने खिलाड़ियों का चयन किया था।