संसद का मॉनसून सत्र 18 जुलाई से शुरू होकर 12 अगस्त तक चलेगा। इसी मॉनसून सत्र के दौरान नए राष्ट्रपति का चुनाव भी होगा और इसके साथ ही नए उपराष्ट्रपति का भी चुनाव होना है जो राज्यसभा के सभापति भी होते हैं। मॉनसून सत्र में लगभग आठ विधेयक पारित किए जा सकते है और 24 नए विधेयक संसद के पटल पर पेश किए जाएंगे।
दोनों सदनों में राजनीतिक विभाजन जैसी स्थिति के चलते अधिकांश विपक्षी दलों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला द्वारा शनिवार को बुलाई गई सर्वदलीय बैठक का बहिष्कार किया। राजनीतिक दलों के बीच मतभेद को देखते हुए उम्मीद जताई जा रही है कि संसद अपने संभावित 18 सत्र में अधिक कार्य नहीं कर सकेगा।
मंगलवार को सरकार ने श्रीलंका संकट को लेकर सर्वदलीय बैठक बुलाई है। हालांकि पहले दो सप्ताह के दौरान संसद की कार्यवाही में राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनाव हावी रह सकते है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के नेतृत्व वाली सरकार ने पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनकड़ को उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित किया हैं। दोनों सदनों के सांसद 6 अगस्त को उपराष्ट्रपति के चुनाव में हिस्सा लेंगे। वहीं दूसरी तरफ विपक्ष ने राजस्थान की पूर्व राज्यपाल और पूर्व केंद्रीय मंत्री मार्गरेट अल्वा को अपना उपराष्ट्रपति उम्मीदवार बनाया है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) नेता शरद पवार ने रविवार को उनके नाम की घोषणा की। मार्गरेट अल्वा के चुनाव जीतने की बहुत कम संभावना है।
इसी तरह 18 जुलाई को होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में भी विपक्ष ने संयुक्त रूप से यशवंत सिन्हा को अपना उम्मीदवार बनाया है जो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की तरफ से प्रस्तावित राष्ट्रपति उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू का सामना करेंगे।
हाल के दिनों तक यशवंत सिन्हा जोर- शोर से प्रचार में लगे रहे लेकिन मुर्मू को भाजपा के अलावा अन्य दलों के सांसदों से भी समर्थन मिल रहा है। इसमें शिवसेना जैसे वो विपक्षी दल भी शामिल है जो कई मुद्दों पर भाजपा का साथ नहीं देते है। यह सब देखकर ऐसा लगता है कि द्रोपदी मुर्मू आसानी से राष्ट्रपति चुनाव जीत लेंगी।
संसद सत्र के दौरान कई महत्वपूर्ण विधेयक (जो विवादित नहीं है) संसद पटल पर बहस और चर्चा के लिए रखें जाएंगे। चार विधेयक पहले ही चर्चा के बाद विभागीय स्थायी समिति द्वारा पारित किए जा चुके है। इन चार विधेयक पर पहले ही आम सहमति बन गई है। इनमें एंटी- मैरीटाइम पायरेसी विधेयक, 2019 है जो समुद्री कानूनों पर संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि को लागू करता है जो समुद्री सीमा में घुसपैठ करने वालों को मौत की सजा देने की अनुमति प्रदान करता है।
माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण और कल्याण (संशोधन) विधेयक, 2019 भी स्थायी समिति द्वारा मंजूर किया जा चुका है और इसके पारित होने की भी संभावना है। यह विधेयक माता पिता के भरण पोषण के लिए दी जाने वाली राशि की ऊपरी सीमा हटाता है और बच्चों, माता-पिता और रिश्तेदारों को फिर से परिभाषित करता है। राष्ट्रीय एंटी-डोपिंग विधेयक, 2021 के भी इस सत्र में पेश किए जाने की संभावना है जिसमें खेलों में डोपिंग को रोकने का प्रावधान है और वन्य जीव संरक्षण (संशोधन) बिधेयक, 2021 कानून के तहत संरक्षित प्रजातियों की संख्या को बढ़ाने की बात की गई है। इस विधेयक के भी पारित होने की पूरी संभावना है।
उत्तर प्रदेश में जनजातियों की संख्या में संशोधन की अनुमति देने वाले एक संशोधक विधेयक के भी पारित होने की संभावना है।
इन विधेयकों में अर्थव्यवस्था और कारोबार को प्रभावित करने वाले ‘ऋणशोधन अक्षमता एवं दिवालिया संहिता (संशोधन) विधेयक, 2022 पर भी चर्चा की जा सकती है। यह विधेयक दिवालिया संहिता, 2016 में बदलाव लाएगा और सीमापार दिवालिया होने वाली कंपनियों के लिए एक नए कानून का प्रस्ताव करेगा।
उद्यमों एवं सेवा केंद्रों के विकास (देश) विधेयक,2022 के जरिये विशेष आर्थिक क्षेत्र कानून में संशोधन लाया जा सकता है। बहु राज्य सहकारी समितियां (संशोधन) विधेयक ,2022, राज्य सहकारी समितियों के जमाकर्ताओं और सदस्यों को निहित स्वार्थ और कुप्रबंधन से बचाने के लिए सरकार की भूमिका को युक्तिसंगत बनाएगा। प्रतिस्पर्धा (संशोधन) विधेयक, 2022 का मुख्य लक्ष्य भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग के शासकीय ढांचे में परिवर्तन लाना और आधुनिक बाजार की मांग के अनुरूप बनाना है।
आने वाले कानूनों में डेटा सुरक्षा को लेकर कोई कानून नहीं है । संयुक्त संसदीय समिति ने इसे पहले ही मंजूरी दे दी थी लेकिन हितधारकों से परामर्श अभी भी जारी है। ई-कॉमर्स, डेटा स्थानीयकरण और अन्य डिजिटल अर्थव्यवस्था से संबंधित पहलुओं को देखते हुए यह सबसे अहम और दूरगामी कानून हो सकता है। सरकार संभवतः इस बिल को आने वाले शीतकाल तक के लिये स्थगित कर सकती है। विपक्ष के लिए आने वाला सत्र काफी उत्साहजनक और राजनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण होने वाला है। भाजपा द्वारा शिवसेना को हटाने और नेताओं के दल बदलने से संबंधित मुद्दों के साथ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा की जा रही कार्रवाई और वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) से संबंधित मुद्दे सरकार को घेरने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। राज्यसभा के संचालन को लेकर निवर्तमान उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के पीठासीन सभापति वेंकैया नायडू द्वारा गठित समिति ने नये नियमों संसदीय की घोषणा की है जिसको लेकर सरकार के बयान का इंतज़ार होगा। अगर उपराष्ट्रपति चुनाव जीतते हैं तो जगदीप धनखड़ संसदीय प्रक्रिया में दखलंदाजी करने वाले नेता पर कड़ी कार्रवाई कर सकेंगे।