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निजी अस्पतालों में कराया ज्यादा इलाज

Last Updated- December 11, 2022 | 2:21 PM IST

आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई) के पैनल में 28,311 पंजीकृत अस्पताल हैं जिनमें 54 फीसदी सरकारी अस्पताल हैं। लेकिन बिज़नेस स्टैंडर्ड के विश्लेषण के मुताबिक इस योजना के तहत सरकारी अस्पतालों की तुलना में प्राइवेट अस्पतालों में मरीज अधिक दाखिल हुए।
एबी-पीएमजेएवाई के तहत अस्पतालों में 3.8 करोड़ मरीज दाखिल हुए। इस योजना में पंजीकृत 46 फीसदी निजी अस्पताल ही हैं लेकिन इनमें कुल मरीजों के 54 फीसदी मरीज दाखिल हुए। मंत्रालय की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक इस योजना के तहत निजी अस्पतालों में प्रति व्यक्ति दावा 13,730 रुपये रहा जबकि सरकारी अस्पतालों में प्रति व्यक्ति दावा 9,045 रुपये था। लिहाजा सरकारी अस्पतालों की अपेक्षा निजी अस्पतालों में प्रति व्यक्ति दावा 51 फीसदी अधिक रहा।
यह योजना चार साल पहले शुरू की गई थी। इस योजना के तहत 19 करोड़ लोगों को कार्ड जारी किए जा चुके हैं। यह योजना 33 राज्यों व केंद्रशासित राज्यों में संचालित है। अभी यह योजना दिल्ली, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में शुरू न​हीं हुई है। इस योजना का ध्येय लाभार्थियों को नकद रहित और पेपर रहित स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराना है।
इस योजना के तहत अस्पताल में भर्ती होने के बाद प्रति परिवार को सालाना 5 लाख रुपये तक के खर्च का कवर मुहैया कराया जाता है।
विश्लेषण के अनुसार गरीब राज्य इस योजना का फायदा नहीं उठा पाए। इस योजना का लाभ अमीर राज्यों और बेहतर स्वास्थ्य सुविधा वाले राज्यों ने अधिक लिया। उदाहरण के तौर पर एबी-पीएमजेएवाई के तहत केरल में पंजीकृत अस्पतालों में 1,000 व्यक्ति पर प्रति बिस्तर अनुपात 5.3 था जबकि बड़े राज्यों में सबसे खराब यह अनुपात बिहार में 0.8 और राजस्थान में 0.4 था। आश्चर्यजनक रूप से बड़े राज्यों में बिहार में दावे का अनुपात सबसे अधिक था। बिहार में 89.3 फीसदी दावों का भुगतान किया गया। दावे भुगतान के मामले में राजस्थान पिछड़ गया और 2.5 फीसदी दावों का भुगतान हुआ।
इस योजना का लाभ बुजुर्ग और महिलाएं समुचित ढंग से नहीं उठा पाए हैं। इस योजना के तहत अस्पताल में दाखिल किए गए मरीजों में 52 फीसदी पुरुष थे। अस्पताल में दाखिल हुए 24 फीसदी मरीज 30-44 साल के थे और 22 फीसदी मरीज 60 साल से अधिक उम्र के थे। लिहाजा अस्पताल में बुजुर्गों की तुलना में 30-44 साल के मरीज अधिक भर्ती कराए गए। अस्पताल में 21 फीसदी मरीज 15-29 आयु वर्ग के थे।
यह योजना निधि के उपयोग के मामले में पिछड़ चुकी है। साल 2019-20 और 2021-22 के दौरान 19,200 करोड़ रुपये का बजट मुहैया कराया गया था लेकिन इसका 46 फीसदी 8,832.5 करोड़ रुपये ही इस्तेमाल या जारी किए गए।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) के प्रदर्शन की प्रशंसा करते हुए रविवार को ट्वीट किया,’ इस मिशन ने एक दिन में रिकार्ड 27 लाख लिंक को शामिल किया है। यह मिशन एक करोड़ स्वास्थ्य आंकड़ों वाले डिजिटल लिंक के ऐतिहासिक कीर्तिमान को पार कर चुका है।’ 

First Published - October 2, 2022 | 11:09 PM IST

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